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Monday 20 Nov 2017

जनवरी 15 के अंक में दोनों शोध आलेख बहुत अच्छे लगे। इस अंक की सर्वाधिक यर्थाथवादी कहानी थोपना आज की सच्चाई को बयान करती है।

जनवरी 15  के अंक में दोनों शोध आलेख बहुत अच्छे लगे। इस अंक की सर्वाधिक यर्थाथवादी कहानी थोपना आज की सच्चाई को बयान करती है। बच्चों की मानसिकता को नजऱअंदाज करने का अंजाम क्या होता है, कहानी में कई पक्षों, दृष्टांतों के द्वारा उकेरा गया है। लडक़ी बिकाऊ नहींहै, कहानी का शीर्षक अपनी सार्थकता चित्रित करता है। सभी कविताएं अर्थवान हैं। खासतौर पर बलदेव वंशी की कविता बेहद पसंद आई। भ्रष्टाचार हेल्पलाइन व्यंग्य में भष्टाचारियों की सारी कलई प्रभाकर चौबे जी ने खोल कर रख दी है। इस अंक का मुखपृष्ठ भी बेहद पसंद आया।

डा. बूला कार

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