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Thursday 24 Oct 2019

अक्षरपर्व के विगत कुछ अंकों को पढऩे से ऐसा लगता है कि अक्षरपर्व के रूप में सारिका ही पुनर्जीवित हो उठी है।

अक्षरपर्व के विगत कुछ अंकों को पढऩे से ऐसा लगता है कि अक्षरपर्व के रूप में सारिका ही पुनर्जीवित हो उठी है। एक साथ छ:, सात कहानियां। कुछ वैसी सामग्रियां भी जो सारिका में प्राय: दुर्लभ रहतींथीं, यथा समीक्षाएं, ललित निबंध, कविताएं आदि जो अक्षरपर्व को सारिका से भी ऊपर उठा देती हैं। इसके अंक में आने वाली प्रस्तावना का अपना अलग महत्व है जो पत्रिका की जान होती है। हमेशा प्रस्तावना के अंतर्गत एक नितांत दुर्लभ और नयी सामग्री ..। बधाई।

डा.वासुदेव, धर्मशिला कुटीर, ग्राम- अरसंडे, पत्रा-बोड़ेया

जिला रांची 834006, झारखंड

मो.9430303094