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Monday 20 Nov 2017

बी.आर. यादव स्मृति व्याख्यान


बिलासपुर। रावत नाच महोत्सव समिति द्वारा स्व. बी.आर. यादव की स्मृति में एक व्याख्यानमाला प्रारंभ की गई है जिसके पहले व्याख्यान कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रूप में दैनिक देशबन्धु के प्रधान सम्पादक ललित सुरजन उपस्थित थे। इस अवसर पर व्याख्यानमाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संयोजक डॉ. कालीचरण यादव ने लोक संस्कृति के विकास में स्व. बी.आर. यादव के योगदान को रेखांकित करते हुए कार्यक्रम के औचित्य पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित महापौर किशोर राय ने स्व. यादव को याद करते हुए उन्हें मिलनसार, सहज उपलब्ध और प्रेरणादायक व्यक्ति का धनी बताया और कहा कि वे अजातशत्रु थे। उन्होंने इस तरह के आयोजन की सराहना की।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के जनकवि और साहित्यकार जीवन यदु (खैरागढ़) की छत्तीसगढ़ लोक संस्कृति पर एकाग्र पुस्तक ‘माई कोठी के धान’ का लोकार्पण किया। प्रमुख वक्ता के रूप में ललित सुरजन ने ‘लोकप्रिय संस्कृति और लोक संस्कृति’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि हमारा समाज विचार शून्य होता जा रहा है। हमने संस्कृति को कई खांचों में बांट दिया और लोक संस्कृति को शास्त्रीय संस्कृति के सामने हीन समझा जाता है। लोक संस्कृति जन संघर्षों में जनता के काम आती है। इस तरह वह अपनी सार्थकता भी सिद्ध करती है। लोक संस्कृति नदी के उद्गम अथवा झरने की तरह स्वत: स्फूर्त होती है। जबकि लोकप्रिय संस्कृति एक आरोपित संस्कृति है। लोक में रची गई चीजें अनुभवजनित हैं और अनुभव जीवन से प्राप्त होते हैं उसमें आडम्बर और किसी प्रकार का आरोपण नहीं है। लोक संस्कृति का बहुत बड़ा हिस्सा श्रम के परिहार के उद्देश्य से रचा गया है। लोकप्रिय संस्कृति विलास की संस्कृति है और उन लोगों के लिए होती है जो दूसरों के श्रम पर आश्रित होकर जीवन जीते हैं। लोक संस्कृति आंसू, पसीने और खून की रचना है। अब जबकि संस्कृति और समाज का संबंध टूट गया है, हम अकिंचन हो गए हैं। हम नहीं जानते कि जीवनी शक्ति कहां से प्राप्त करें। आज समाज को संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए। संघर्षों के लिए शक्ति कहां से प्राप्त होगी, यह हमारे गहन विचार का विषय होना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राजेश्वर सक्सेना ने लोक संस्कृति की वर्तमान दशा पर अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में राजेश पांडेय, सरोज मिश्र, नथमल शर्मा, रफीक खान, नमिता घोष, मंजू मित्रा, सरोज कश्यप, पीयूषकांति मुखर्जी, डॉ. रामगोपाल यादव, तिजऊराम यादव, विशंभर यादव, बुधराम यादव, कृष्णकुमार यादव, रामकुमार यादव, जी.आर. यादव, ओमप्रकाश गंगोत्री, मधुकर गोरख, शाकिर अली, अभिमन्यु यादव, संतोष यादव, रामनारायण यादव, कामता यादव, नंदकुमार कश्यप एवं नगर के बुद्धिजीवी व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शोभित वाजपेयी तथा आभार प्रदर्शन डॉ. रामगोपाल यादव ने किया।