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Saturday 18 Nov 2017

बंगला रम्य रचना : क्षण विप्लव

मूल एवं रूपांतर
राधा बोस
 गोपाल मंदिर वाली गली
बूढ़ापारा, रायपुर (छ.ग.)

स्थान कवीन्द्र मंच, समय मध्य रात्रि, सभास्थल पर नाना प्रकार के कीट पतंगे जैसे- मच्छर, मक्खियां, छिपकली, काकरोच आदि खुसुर-खुसुर कर रहे हैं। झिंगुर दल, पथ्य संगीत प्रस्तुत कर रहे हैं एवं जुगनुओं के दल ने रौशनी का दायित्व संभाल रखा है। मंच पर छिपकलियों के समूह को सभा का संचालन करते हुए देखा जा सकता है। विशिष्ट अतिथि द्वय मूषकराज एवं छछुन्दर राज क्रमश: सभापति एवं सहसभापति के आसन पर विराज रहे हैं। वे दोनों विशेष साज-सज्जा में मंच पर शोभायमान हैं। मूषकराज की गर्दन पर एक लाल रूमाल टाई की तरह बंधा हुआ है। सर पर हैट-कोट-पैन्ट, सूट-बूट में हीरो लग रहे हैं। छछुन्दर राज भी कुछ कम नहीं लग रहे हैं- धोती, कुर्ता, गले पर लिपटी चादर- पूरे बंगाली बाबू मोशाय। मंच पर लम्बे-लम्बे बैनर टांगे गए थे, लिखा था- ''कीट पतंग-महासम्मेलनÓÓ, ''हमारी मांगे- अभ्यारण्य चाहिएÓÓ, शोरगुल में समूह गान प्रस्तुत किया गया। तुरन्त बाद ही छिपकली युवा दल द्वारा गीत-नृत्य शुरू किया गया। सभी कलाकारों ने चुस्त पैन्ट, लाल शर्ट, उल्टे कॉलर के पहिन रखे थे। ''दुनिया को बदल डालो-उलट डालो, पलट डालो, जला डालो।ÓÓ आदि गरमा-गरम, नाच-गाना चलता रहा। थोड़ी देर बाद ही नारेबाजी शुरू हुई- ''हमारी मांगें पूरी होंगी- पूरी होंगी- अभ्यारण्य देना होगा-देना होगाÓÓ विप्लवी दल जिन्दाबाद, जिन्दाबाद, जिन्दाबाद, मानव हमारे दुश्मन हैं- दुश्मन हैं, मानव जाति- मुर्दाबाद-मुर्दाबाद-मुर्दाबाद। उत्तेजना से सभागृह का माहौल पूरी तरह गरमा गया था। अंत में सचिव भारी भरकम स्थूलांगी माई फेयर लेडी छिपकली गृहिणी ने माइक सम्हालते हुए सभापति महोदय से सभा की कार्रवाई शुरू किए जाने की अनुमति चाही, सभापति महोदय गद्गद् होकर उठ खड़े हुए और हैट हाथ में लेकर अंग्रेजी कायदा अनुसार झुककर बाउ किया, फेयर लेडी ने चेहरा घुमाते हुए सलज्ज कंठ स्वर से कपट क्रोध के साथ व्यंगोक्ति की- ''मुए का ढंग देखोÓÓ। ''मौका मिला नहीं कि लाइन मारने लगाÓÓ, एक अन्य ने फुसफुसाकर कहा। लेकिन इस व्यंगोक्ति पर तथाकथित 'मुएÓ ने नाराजगी नहीं जताई- वरन मुस्कुराकर कहा- ''थैंक्स फॉर दी कॉम्प्लीमेंटÓÓ। आगे संबोधित करते हुए कहा- ''प्रिय मित्रो, सबसे पहले मैं आप सबको धन्यावद देता हूं कि इस अभूतपूर्व सभा में आपने हम नाची•ा को आमंत्रित किया। निष्ठुर मानव शासित इस भूमंडल में हिंसक प्राणियों पर भी दया और सहानुभूति पूर्ण रुख अपनाया जाता है। उन्हें पिंजरों के बंधन से मुक्त किया जा रहा है। उनके लिए बड़े जोरशोर के साथ अभ्यारण्य निर्धारित किए जा रहे हैं ताकि वे सुखचैन से वहां घर गृहस्थी बसा सके। किन्तु इसके विपरीत आप सबके लिए उन जल्लादों के मन में जरा भी सहानुभूति या दया भाव नहीं है, वरन किस तरह हमें निश्चिह्नï कर दिया जाए उसी की कोशिशें जारी है। इन नर राक्षसों के अत्याचारों से व्यथित एवं पीडि़त आप सबसे अनुरोध है कि एक-एक करके इस मंच पर उपस्थित होकर अपनी करुण कथा सबको सुनाएं और इसका निदान ढूंढे। इस कड़ी में मैं सर्वप्रथम वरिष्ठतम बुजुर्ग काकरोच दादा को आमंत्रित करता हूं। दादा गुटगुट आकर माइक से लिपटकर रो पड़े। उनकी सिसकियों से भरी घुर्र-घुर्र आवाज सबकी समझ से परे थी। लोग विस्मित से चुप हो गए। सबकी चुप्पी तोड़ते हुए छिपकली दल के एक नवीन सदस्य ने चिल्लाकर कहा- रोना बंद करके कृपया अपना पक्ष प्रस्तुत करें, अन्यथा अपने आसन पर वापस जाएं। वापस जाने की बात सुनकर दादा कुछ सम्हलकर बोले- भाइयों, क्या बताऊं, उन अत्याचारी मनुष्यों ने हमें वध करने लिए एक ''कुलक्षण रेखाÓÓ पहले ही ढूंढ निकाली थी और अब हथियार खोजे जा रहे हैं। कहा जा रहा है दवा के असर से एक काकरोच दूसरे काकरोचों को न्यौता देकर बाहर ले आएगा एवं पूरे समूह का सत्यानाश करवा देगा। हाय! हाय! घर का भेदी लंका ढाय, इस तरह हम नित्य नये फन्दों में फंसकर नष्ट होते जा रहे हैं। दादा आंसू बहाने लगे। इसी बीच स्थानीय पुस्तकालय में रहने वाली एक इतिहासकार छिपकली बोल उठी- दादा, अगर इतिहास पढ़े होते तो यह मुसीबत न आती। अब कौन नहीं जानता- सत्ययुग में एक मानव सुन्दरी उस कुलक्षण रेखा को लांघकर किस तरह किडनैप हुई और उनकी कैसी-कैसी दुर्गति हुई। एक अन्य युवा तुर्क ने गाली बकी, साला- लालची बुढऊ, जहां टुकड़े दिख गए वहीं पूरे कुनबे के साथ कूद पड़े, तुम सब मनुष्यों को बेवकूफ समझते हो? अरे, वे बड़े दिमाग वाले हैं। तुम्हारा नेचर वे खूब समझ चुके हैं, मरो, लालची, लोभी सब फंदों में पड़कर, स्सा... उसने फिर गाली बकी। काकरोच दल ने इस व्यंगोक्ति पर बुरी तरह अपमानित महसूस करते हुए तीव्र आपत्ति की। देखिए- हम यहां सीनियरमोस्ट हैं, इस तरह हमारा मजाक उड़ाया जा रहा है। खबरदार, सीनियरिटी क्लेम करने से पहले इतिहास पढिय़े। अरे ओय- हम छिपकली डायनासोर के दादा-दादी माने जाते हैं, कोई-कोई वैज्ञानिक हमें उनकी फूफा-फूफी भी मान रहे हैं, सीनियरिटी पर हमें आप चैलेंज नहीं कर सकते। ये जो बर्बर, असभ्य मनुष्य जाति है क्या ये हमारी जाति को रोक सके हैं या कोई फंदा हमारे लिए बना पाए हैं? सभागृह में चुप्पी छा गई। सभापति द्वय ने सर हिलाकर कहा- हां, बात में दम है, भई- मानना पड़ेगा, इस चुप्पी का फायदा उठाकर मच्छर-मक्खी वर्ग हो-हो कर शोर करने लगे। अब यहां हमारी सुनवाई भी होगी या नहीं? हमारी दुर्दशा की गाथा भी कोई सुनेगा? ये जल्लाद मनुष्य जाति जहरीली जलेबी जलाकर तरह-तरह की दवा छिड़ककर, कभी सड़कों पर गैस छोड़कर निरंतर हमें नष्ट कर रही है। किन्तु हमारी जाति की वीरता देखो- इतनी शहादत के बाद भी पीछे नहीं हटे। हम झुंड के झुंड उन पर जवाबी हमला बोल रहे हैं। बूंद-बूंद खून चूसकर भयंकर बीमारी फैला रहे हैं। सैकड़ों मर रहे हैं बीमार होकर, मर मुएं मर, तेरे पुरुषों का वो नष्ट होये- तेरी औरतों का, औरतों का- वाक् युद्ध, उत्तेजित कीट पतंगें, अशालीन भंगिमा करने लगे। उनके असभ्य इशारों से छिपकली समाजवादी नेत्री मिस मार पकड़कर तीर की तरह मूशक नेता का कॉलर पकड़कर कसकर थप्पड़ मारते हुए बरसी- कैपिटलिस्ट रक्त शोषक- भद्र महिलाओं पर अशोभन इशारे करता है- चाहे वो दुश्मनों की मां-बहनें-बीवी ही क्यों न हो। महिलाओं का अपमान सहा नहीं जाएगा। अहा- तू, तू कहां की हरिभक्तिन है। हमें सब मालूम है- मूशक नेता ने आंख मारी। समाजवादी छिपकली दल के युवाओं से मिस पकड़मारकर का अपमान बर्दाश्त नहीं हुआ। पलक मारते ही वे कूद पड़े। बड़ी वीरता के साथ वे कीट पतंगों के दल को गप-गप करके निगलते हुए आगे बढ़े, चारों ओर भगदड़ मच गई। जुगनू दल अपनी बत्ती गुलकर भाग निकले। इसी बीच काकरोच दल ने अपना बदला निकालते हुए फर-फराकर चारों ओर लाल मिर्च पाउडर छिड़क दिया। आंसू बहाते हुए सारे सभासद दिशाहीन से इधर-उधर दौड़ पड़े। सभापति द्वय सभा समप्ति की घोषणा किए बगैर ही दरवाजे की ओर भागने  ही वाले थे कि भवन के रक्षकों के सामने ठिठक गए। रक्षकों ने अपनी ड्यूटी निभाते हुए लाठी से पीट-पीटकर उन्हें मार डाला। रातों रात उनकी लाश गायब कर दी गई। गेापनीय सूत्र से समाचार पाकर मीडिया वालों ने एक-दूसरे की टांग खींचते हुए विभिन्न पार्टियों पर आरोप-प्रत्यारोप का पिटारा खोल दिया, कुछ दिनों तक इस विषय पर गहमा-गहमी होती रही, अखबारों की हेडलाइन बनती रही, इन्क्वायरी कमीशन गठित हुई। अंतत: सबूत न मिलने के कारण फाइल क्लोज कर दी गई। यथा रीति-रिवाज के अंतर्गत शांति जल सिंचन करते हुए एक क्षण विप्लव की इतिश्री घोषित की गई।