Monthly Magzine
Friday 24 Nov 2017

सामने वाली जेब

गश्त-गिर्दावरी (उफऱ्  तहसीलदारी में जो देखा)
सवाई सिंह शेखावत
7/86, विद्याधर नगर जयपुर-302023
मो.9636298846

मेरे एक नायब तहसीलदार के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने कार्रवाई की। उनके विरूद्ध दायर परिवाद में टै्रक्टर की लोन फाइल में भूमि सम्बन्धी प्रमाणीकरण के एवज में रिश्वत माँगे जाने का आरोप था।
 भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की योजना के अनुसार परिवादी रिश्वत की राशि नायब तहसीलदार को देने के लिए उपतहसील पहुँचा। 'नायब साहब यह लीजिए ट्रैक्टर लोन फाइल की आपकी फीस।Ó
यह कहते हुए जब वह राशि जेब में डालने की कोशिश करने लगा तो नायब तहसीलदार अचकचा गया और उसे यह भी लगा कि शायद कुछ गड़बड़ है। उसने राशि लेने से साफ  इन्कार करते हुए अच्छा खासा प्रतिवाद भी किया।
इस अड़ाअड़ी में सिविल ड्रेस में तैनात ए.सी.डी. के जाब्ते ने नायब तहसीलदार को कसकर पकड़ लिया और अंतत: परिवादी रिश्वत की राशि नायब तहसीलदार की सामने वाली जेब में डालने में कामयाब हो गया। और इस तरह भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने नायब तहसीलदार को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
लेकिन मामले की असलियत कुछ और थी। एक दल विशेष के राजनेता नायब तहसीलदार से खासे नाराज थे और उसे फँसाने के लिए ही यह मामला तैयार किया गया था। राजनेताओं और ए.सी.डी. वालों की मिलीभगत से उस तहसील में पहले भी कुछ ऐसे मामले हो चुके थे। राजस्व अधिकारियों में इसे लेकर अच्छा-खासा खौफ था और इस तहसील में पदस्थापन से बचने की भी भरसक कोशिश की जाती थी।
कार्यवाही के बाद प्रभारी ए.सी.डी. अधिकारी से मैंने बात की 'बेचारे नायब तहसीलदार को फँसाया गया हैÓ। उनका तर्क था कि ''देखिए हमारे यहाँ तो एफ.आई.आर. दर्ज हुई है इसलिए हमारा कार्यवाही करना लाजमी था।ÓÓ फिर उन्होंने पलट कर यह भी पूछा कि ''क्या आपका नायब तहसीलदार वाकई हरिशचन्द्र है?ÓÓ
'ऐसे हरिशचन्द्र तो आप भी नहीं हैÓ मेरी तुरन्त खरी-खरी सुनाने की इच्छा हुई। लेकिन मौके की नजाकत देखकर मैं चुप रहा।
लेकिन इस मामले में सबसे दिलचस्प प्रतिक्रिया तहसील कर्मचारियों की रही। नायब साहब की सामने वाली जेब में जबरदस्ती रिश्वत की राशि डाल कर उन्हें फँसाया गया है यह खबर मिलते ही उन्होंने एक आपातकालीन बैठक बुलाई। बैठक में व्यापक विचार-विमर्श हुआ। रिश्वत लेने-देने के तरीको पर भी बात हुई लेकिन किसी ने भी रिश्वत की नैतिकता और अनैतिकता को लेकर कोई सवाल नहीं उठाया। सभी की राय में सारा संकट सामने वाली जेब को लेकर था। यदि वह नहीं होती तो नायब साहब नहीं फँसते। लिहाजा सर्वसम्मति से बैठक में निर्णय लिया गया कि आइन्दा शर्ट सिलवाते समय सामने वाली जेब हरगिज नहीं लगवाई जाए।