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Monday 20 Nov 2017

हर प्रकार अनुगूंज है उसकी

 

नंद किशोर आचार्य
सुथारों की बड़ी गुवाड़
बीकानेर-334005, मो.9413381045

हर प्रकार अनुगूंज है उसकी
(सात कविताएं)
1. सूना कर दिया

सूने ही रह गए होते
मैंने नहीं बसाया होता
जो तुम को-
और एक यह तुम हो
खुद को बसाकर
मुझ में
सूना कर दिया मुझको।

2. कर दिया $खयाल

मु•ास्सिम हो भी चाहे
तुम
लो, यह कर दिया
मैंने $खयाल तुमको
घूमता रहे वक़्त कितना
वह कमबख्त अब
छू तक नहीं पाएगा
कभी मेरे हक को।

3. पुकार

तुम्हारी जिस प्रकार की
गूंज हूं मैं
मेरी हर प्रकार अनुगूंज है
उसकी
एक बेकल पुकार है
सृष्टि यह सारी भटकती हुई
खोज में जाने किस खुद की
4. कोणार्क

शिलित कर दिया है
शिल्पी ने काल का रथ
इन शिलाखंडों में
काल करता रहा है
कोशिश निरंतर
मिटाने रूप वह अपना
रचा है पत्थरों में जो
रहेगा इन पत्थरों की
स्मृति में लेकिन
वह सदा स्पन्दित

5. प्रतीक्षा में

सूख गया है जो
शाख से जुड़ा है
अब की
प्रतीक्षा में
हवा के एक झोंके की
यह क्या कम है
जिसके झोंकों में
झूमता था वह
उसी हवा में भर जाएगा
अब।

6. फिर भी कृतज्ञ है वह

बारिशें बीतती जाती रहीं
हर बार
नियति ठूंठ की लेकिन
हरे की प्रतीक्षा ही रही-
फूल-फल तो क्या
एक पत्ती तक नहीं खिली
फिर भी कृतज्ञ है वह
न खिल पाया हरा चाहे
कुछ भिगोया तो सही बारिश ने
यह सूखा वजूद उसका
कुछ एक पल ही सही।

7. परस भर से

धूसर मटमैला हो चला
जो पेड़
कैसा दमक उठा देखो
किरण के एक हलके से
परस भर से।