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Thursday 23 Nov 2017

अक्षरपर्व के जनवरी अंक में प्रेमशंकर रघुवंशी और श्यामसुंदर दुबे की कविताएं अच्छी लगीं।

अक्षरपर्व के जनवरी अंक में प्रेमशंकर रघुवंशी और श्यामसुंदर दुबे की कविताएं अच्छी लगीं। शिवनंदन कपूर व भारत यायावर के आलेख भी वजऩ की रचनाएं हैं। सर्वमित्रा सुरजन का गीता पर कमेंट एक ओछी कोशिश है। छोटा मुंह, बड़ी बात, गीता को बीसियों बार पढ़ा जाए तो कुछ समझ में आती है, परंतु नम्र भाव होना अनिवार्य है। गीता में एक स्थान पर कहा गया है-जो लोग सतत प्रयत्नशील हैं, और प्रेमपूर्वक मेरा भजन करते हैं उन्हें मैं बुद्धि का योग (गिफ्ट में) देता हूं ताकि वे मुझ तक पहुंच सकेें....और तुलसी कहते हैं:
हरिहर पद रति, मति न कुतर्की
तिन कहूं मधुरक या रघुबर की...
शुभकामनाओं सहित
पूरनचंद बाली नमन, आयु 75 वर्ष
सी । 1606, ओबेराय स्पलेण्डर,
जेबीएल रोड, जोगेश्वरी (पूïर्व)
मुंबई-60