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Tuesday 23 Oct 2018

अक्षर पर्व का जनवरी अंक काफी अच्छा निकला है। ललितजी की प्रस्तावना पढ़कर सुखद आश्चर्य हुआ कि उन्होंने मलयजी की कविताओं और उनके कवि-व्यक्तित्व पर अच्छा लिखा है।

अक्षर पर्व का जनवरी अंक काफी अच्छा निकला है। ललितजी की प्रस्तावना पढ़कर सुखद आश्चर्य हुआ कि उन्होंने मलयजी की कविताओं और उनके कवि-व्यक्तित्व पर अच्छा लिखा है। मलय मेरे भी मित्र हैं। उनसे 1972 के आसपास परसाईजी के साथ इलाहाबाद के लेखक सम्मेलन में भेंट हुई थी। उनकी कवि-प्रकृति और लेखन से मेरा भी परिचय है। वैसे प्रस्तावना में आगे भी उन पर चर्चा अपेक्षित होगी। प्रस्तुत अंक में नंद चतुर्वेदी का लेख, जयनंदन की कहानी, भारत यायावर का निराला के भिक्षुक को लेकर लिखा गया लेख, अशोक सेकसरिया के संबंध में जवाहरलाल गोयल और सुरेश शा के संस्मरणात्मक लेख काफी ठीक लगे। अंक में सर्वमित्राजी ने गीता को राष्ट्रीय  दर्जा शीर्षक उपसंहार में अपना सही मंतव्य व्यक्त किया है, जो सहमतियोग्य लगा।     ï    
    रामनिहाल गुंजन, नया शीतला टोला, आरा, बिहार