Monthly Magzine
Sunday 19 Aug 2018

अक्षरपर्व जब से नए कलेवर में छपने लगा है, कहानियां, आलेख एवं अन्य स्तंभ बड़ी सतर्कता से देखे जा रहे हैं, ऐसा लग रहा है।

अक्षरपर्व जब से नए कलेवर में छपने लगा है, कहानियां, आलेख एवं अन्य स्तंभ बड़ी सतर्कता से देखे जा रहे हैं, ऐसा लग रहा है। ललित भैया की प्रस्तावना संग्रहणीय होते जा रही है। उन्हें आगे चलकर पुस्तकाकार में लाना होगा। समकालीन संदर्भों में सर्वमित्रा सुरजन जी भी बढिय़ा लिख रही हैं।
विजय राठौर, गट्टानी स्कूल के सामने, जांजगीर, छ.ग.
मो.9826115660