Monthly Magzine
Monday 20 Aug 2018

अक्षर पर्व को मैं अक्षरों की ईद कहूं या दीवाली या कहूं आवाज है समाज के आखिरी व्यक्ति की जो सिसकियां भर रही है

 

अक्षर पर्व को मैं  अक्षरों की ईद कहूं या दीवाली
या कहूं आवाज है समाज के आखिरी व्यक्ति की
 जो सिसकियां भर रही है महानगरों के चौराहों में
 गांव के खेत खलिहानों में।

डॉ. रामचन्द्र 'सरस'
संपादक 'माटी', कमासिन- बांदा
मो. 09451093745, 09125501298