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Sunday 19 Nov 2017

अक्षर पर्व मिला। द्विवेदीजी पर आपका शोध-लेख अत्यंत आकर्षक है।

अक्षर पर्व मिला। द्विवेदीजी पर आपका शोध-लेख अत्यंत आकर्षक है। ललितजी, यह आपने बिलकुल सही लिखा कि द्विवेदीजी की दृष्टि मात्र हिंदी साहित्य पर ही नहीं बल्कि वह विभिन्न विषयों पर अपनी बात रखते थे और देश-दुनिया को लेकर चिंता करते थे। वह समय के बहुत पाबंद थे और इसलिए वह सरस्वती का अंक अनिवार्य रूप से पहली तारीख को निकाल देते थे। उस समय भी लेखक समय से रचना नहीं भेजते थे इसलिए द्विवेदीजी कई छद्म नामों से रचनाएं तैयार कर लेते थे। वह लगभग13 छद्म नामों से लिखा करते थे। उनके छद्म नाम हैं - श्रीयुत भुजंग भूषण भट्टाचार्या, श्रीयुत कवि किंकर, श्रीयुत सुकवि किंकर, कुंज, कमल किशोर त्रिपाठी, श्रीयुत श्रीकंठ पाठक, श्रीयुत चक्रपाणि शर्मा, नियम नारायण शर्मा, श्रीयुत पुराणपाठी, श्रीयुत परमेश्वर शर्मा, द्विरेफ, विपन्न और कल्लू अल्हैत।
अनुपम परिहार
अलाहाबाद