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Tuesday 21 Nov 2017

बेजुबानों को जुबां करतार दे

 

परशुराम शुक्ल
आइवरी फ्लेट नं. 20,
पांचवीं मंजिल
प्लेटिनम प्लाजा, टी.टी. नगर
भोपाल-462003
मो. 9826773240
बेजुबानों को जुबां करतार दे।
दे न सकता हो जुबां तो मार दे।

बढ़ चुकीं लाचारियां हद तोड़कर,
या खुदा इनका कोई उपचार दे।

कुछ नहीं इनको मिलेगा उस तरफ,
दे सके जो कुछ इन्हें इस पार दे।

देखते हैं सब हिकारत से इन्हें,
तू खुदा है आज इनको प्यार दे।

मांगने से कुछ नहीं मिलता कभी,
ये नसीहत इन्हें बारम्बार दे।

कांप उट्ठे ये जमीं औ आसमां,
बशर ताकत बस इन्हें इक बार दे।

आज की सियासत

आ गया मौसम मनाने आ गये देखो।
फिर नई दुनिया सजाने आ गये देखो।

एक आया फिर मुकद्दर आजमाने को,
दूसरे उसको हटाने आ गये देखो।

कुछ सियासतदां बशर और कुछ चेहरे नये,
हैं सभी पापी पुराने आ गये देखो।

गुर तिजारत के सभी ये जानते यारों,
साथ में लेकर खजाने आ गये देखो।

कल तलक हिन्दू मुसलमां साथ रहते थे,
आज ये इनको लड़ाने आ गये देखो।

लूट, चोरी, कत्ल, दंगे इस सियासत में,
हैं सभी जायज बताने आ गये देखो।

खामोश हवाएं

पहचानिए कुछ कह रहीं $खामोश हवाएं।
मुद्दत से बोझ सह रहीं खामोश हवाएं।

किस्मत  कभी नहीं खुली खामोश रहीं जो,
ये सोचकर कुछ कह रहीं खामोश हवाएं।

वाजिब नहीं ये सोचना सरकार आपका,
जु ल्मों सितम से ढह रहीं खामोश हवाएं।

पुरजो र कयामत लिए आएगा जलजला,
बनकर सुनामी बह रहीं खामोश हवाएं।

ताकत से बेखबर रहे इनकी इसीलिए,
'अब अलविदाÓ यूं कह रहीं खामोश हवाएं।