Monthly Magzine
Saturday 18 Nov 2017

मौन संविधान

 


अनवर सुहैल
  टाइप 4/3 ऑफिसर कॉलोनी पो बिजुरी
जिला अनूपपुर 484440
मो. 9907978108
एक

फिर कई सवाल
मचा रहे बवाल
ढूंढता जवाब
अपने आस-पास

हंकाल देते वो
हज़ारों साल पीछे
झाँकने को कहते
जहां सवालों की जड़ें हैं

चीखता समाज
मारता ताने-उलाहने
दिग्भ्रमित वर्तमान
और इन सब के बीच
मौन संविधान....

ऐसे में बताओ
क्या करें श्रीमान....

दो

बेशक तुम नही बाँचोगे इन पंक्तियों को
बेशक तुम ऐसे जुते घोड़े हो जिसकी आँखों में पट्टियाँ बंधी हैं
बेशक तुम उतना ही सुनते हो जितना सुनने का तुम्हें हुक्म है
और महसूस करने का कोई जज्बा नहीं तुम में
और मुहब्बत करने वाला दिल नहीं है....

तुम इंसान नहीं एक रोबोट बना दिए गए हो
जिस पर अपना कोई बस नही
दूसरों के हुक्म सुनकर तुम दागते हो गोलियां
घोंपते खंजऱ अपने भाइयों की गर्दनों पर
तुम्हारे शैतान आकाओं ने
आसमानी किताबों की पवित्र आयतों के तरजुमे
इस तरह तैयार किये हैं
कि कत्लो-गारत का इनाम जन्नत-मुकाम है

ओ विध्वंसकारियों
तिनका-तिनका जोड़कर
एक आशियाना बनाने का हुनर तुम क्या जानो
कब तक तुम में जिंदा रहेगा
आशियाने उजाड़कर खुश होने का भरम
क्या यही तुम्हारा मज़हब
क्या यही तुम्हारा धरम....

तीन

जान लो मूर्ख बर्बरों....
अनपढ़-गंवार नहीं
अब विश्व-मानस
और कातिलों को
नहीं बर्दाश्त करेगा कोई

भले ही कितना तर्क-संगत करो
इन खूंरेज़ कारनामों को
इंसान अब भेड़-बकरियों का झुण्ड नहीं है
इंसान सूचनाओं के लिए अब तुम्हारी
ऊटपटांग व्याख्याओं पर निर्भर नहीं है
भले से तुमने चुराई हों पंक्तियाँ पवित्र किताबों से
अपने मन-माफिक उद्धरण चुनकर
मासूमों की जान लेने के लिए
न्यायसंगत बनाना चाहते हो अपने दुष्कृत्य...

जान लो मूर्ख बर्बरों
अब तुम घिर रहे हो
अपने ही बुने जाल में
कि दुनिया में सीधी लड़ाइयां
अब नहीं लड़ी जाएँगी
राजनीतिक, कूटनीतिक, लोकतान्त्रिक तरीके से
आओ, कि इस रास्ते में इंसानियत का
बहता नहीं खून
और पवित्र किताबें
संदेह के घेरे में नहीं आतीं.......

चार

गालियाँ
धमकियां
अफवाहें
बेइज्ज़ती
और नहीं तो पत्थर
इसके अलावा
और नहीं कोई अस्त्र-शस्त्र
पास तुम्हारे
लेकिन हमारी उम्मीदें
हौसला
विश्वास
खुद-मुख्तारी
तुम्हारे हथियारों से
बहुत है भारी
इलाज कराओ
तुम्हें है लाइलाज बीमारी....