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Sunday 21 Jan 2018

अक्षरपर्व के नवंबर, दिसम्बर 14 व जनवरी 2015 अंक अद्भुत रहे। मनोयोग से पढ़ता रहा। उत्सव अंक सचमुच साहित्यिक उत्सव का भान कराता है।

अक्षरपर्व के नवंबर, दिसम्बर 14 व जनवरी 2015 अंक अद्भुत रहे। मनोयोग से पढ़ता रहा। उत्सव अंक सचमुच साहित्यिक उत्सव का भान कराता है। लोक संस्कृति का अनूठा वर्णन बड़ा दिलचस्प है। पूर्व राष्ट्रपति कलाम की कविता दिसम्बर अंक में पढ़ कर कविहृदय का परिचय पाकर बहुत अच्छा लगा। जनवरी अंक में साहित्यकार अशोक सेकसरिया एवं डा.रमेशचंद्र महरोत्रा का स्मृतिवर्णन सार्थक एवं प्रेरणादायक लगा। साथ ही भारतेन्दुजी के भारत भिखारी संदर्भ लेख में बहुत सी सूचनाएं महत्वपूर्ण हैं, जो अभी इतनी ज्ञात नहींथीं।
-गिरीशचंद्र चौधरी, भारतेन्दु भवन, चौखम्भा, वाराणसी-221001