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Wednesday 21 Feb 2018

बताएं और क्या बदला

 जय चक्रवर्ती
एम.1-149, जवाहर विहार
रायबरेली.229010
मो. 098396691
बताएं
और क्या बदला कैलेंडर के सिवा
नव वर्ष में

घोंसले सा घर वही
दफ्तर वही पिंजरेनुमा
वही रोटी, सिर्फ  रोटी
जिंदगी का तरजुमा
बताएं
और कुछ है क्या कहीं इसके सिवा
नव वर्ष में
 
नए सूरज की प्रतीक्षा में
नजऱ धुँधला गई है
झुर्रियों की भीड़
चेहरे पर नई कुछ आ गई है
बताएं
और क्या है नया इस सच के सिवा
नव वर्ष में

रिस रहे हैं घाव तन-मन के
वही अब भी पुराने
सब खड़े मुँह फेरकर
जाएँ कहाँ किसको दिखाने
बताएं
और क्या है इस धरोहर के सिवा
नव वर्ष में
  तुम भी बदलो पापा
बेटा बोला
बदल गई है दुनिया
तुम भी बदलो पापा

भारत को भूलो
इंडिया से
नाता जोड़ो
पियो पेप्सी-कोक
छाछ-लस्सी को छोड़ो
ब्लैकडॉग के सँग
डिस्को-डीजे की धुन पर
उछलो पापा
खत्म गाँव का करो
झमेला
खेत-पात बेचो
चलो राजधानी
महलों की जगर-मगर देखो
बूढ़ी-भाषा
जड़-संस्कारों से अब
बाहर निकलो पापा

मिला करो अब
ट्विटर, व्हाट्सएप और
फेसबुक पर मित्रों से
आपस के सब दुख-सुख
शेयर करो चित्रों से
मेल-मोहब्बत
ख़तो-किताबत अब
बक्से में रख लो पापा

    रहे जब तक पिता
रहे जब तक पिता
घर जैसा रहा घर

एक चौका, एक चूल्हा
एक आँगन, एक छत
एक जैसे मन सभी के
मुँह अलग, पर एक मत
एक डोरी से
बंधे थे धरा-अंबर

उत्सवों जैसा सदा था
उत्सवों का आगमन
दमकती थी द्वार पर
उल्लास की उजली किरन
स्वर अभावों का
कभी ठहरा न पल भर
शीश पर बटवृक्ष सी
छाया हमेशा थी सघन  
शीत, वर्षा, घाम में
शामिल रही स्नेहिल छुअन
डर अँधेरों का
हमेशा रहा डर कर