Monthly Magzine
Wednesday 22 Nov 2017

होमगार्ड है वह !

तपेश भौमिक
आनन्दलोक मॉडल स्कूल        पो. गुडिय़ाहाटी
कूचबिहार-36170, पश्चिम बंगाल मो.09851273109
पहली छवि...
है वह होमगार्ड।
नहीं कोई अफसर या लॉर्ड।            

 कांस्टेबल से कमतर
हालत में बदतर।             

बाकी वर्दीवाले उसके आगे अफसर         

ऊँचाई न होने से मिला नहीं अवसर।     

बेनकेल हल्लाबोलों को ठेलता है         

बेहिचक पथराव को झेलता है।         

बल्ला सा लाठी से ईंट
पत्थरों को  खेलता है।             

कैसे बरसाए लाठी !            

जुलूस के लोग हैं उसके कद काठी ।

खाकी की एक वर्दी            

पुलिस विभाग ने उस पर जड़ दी।         

दिनभर करते जी-हजूरी,          

 जीने की मज़बूरी।
दूसरी छवि ..
वर्षों बाद, इक नई दुल्हन सी तरक्की आई है! खाली जेब की भरपाई है ।
ट्रैफिक की ड्यूटी में सड़क का नवाब है ।
अब कांस्टेबल से आगे हवलदार बनने का देखता ख्वाब है ।             
चौराहे पर हाथ हिलाता है।
खम ठोकता है               
ट्रक रोकता है ,                

वसूली में सिद्धहस्त है,          

 वह मस्त है !              

 अपनी मूछें ऐंठता है           

 एक पल के लिए नहीं बैठता है ।       

 फुर्सत के वक्त अपने पावर का खैनी ठोकता है ,
ट्रक रोकता है।            
मुस्टैण्ड ट्रक-ड्राइवर सरदारजी को घूरता है     

जैसे वह बली का बकरा है             

और ख़ुद उसका त्राता है ।             

मुठ्ठी   गर्म हो जाने पर जाने का फरमान जारी करता है ।               

 कभी-कभी डरता है             
अपने ईमान से लड़ता है ।         
अपनी आपबीती की ओर झाँकता है     
और उस धुंधली छवि को आँकता है ।     
एक दिन, जब वह रिक्शा हाँकता था        

सवारी के लिए ताकता था ।         
बीड़ी का कश लगाकर खाँसता था ।     
शाम को बत्ती न होने पर कोई पुलिसवाला उसे फाँसता था।         
आज़ ख़ुद ऐंठता है..
ख़ुदा जब देता है, छप्पड़ फाड़ कर देता है!
अब बीड़ी सुलगाते हुए हंसी उसे आती है,  

 कल से आज़ तक का साथी है ।
आनेवाला कल सिगरेट का होगा        

क्योंकि मोड़ की एक पान-दुकान गैरकानूनी है ,
उस से ऐंठ कर मुफ़्त की सिगरेट पिएगा    

ऐशो आराम की जिंदगी जिएगा ।       

 बीबी कहती पड़ोसन से लड़कर         

सइयाँ भए कोतवाल, अब काहे को डर !