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Sunday 21 Jan 2018

पत्रिका नियमित प्राप्त हो रही है। अक्टूबर अंक में प्रो.बिपन चंद्रा को याद करते हुए आपने जो लिखा ,वह ज़रूरी था।

पत्रिका नियमित प्राप्त हो रही है। अक्टूबर अंक में प्रो.बिपन चंद्रा को याद करते हुए आपने जो लिखा ,वह ज़रूरी था। अपने समय, साहित्य, इतिहास को जो निर्माण करते हैं, वो प्रो.बिपन चंद्रा जैसी शख्सियतें ही होती हैं, ...उन्हें समय के हर कठिन संदर्भ में याद करना और दूसरों को कराते रहना,अपने समय से मुठभेड़ के लिए ताकत जुटाना है। गोविंद माथुर की कविताएं पसंद आयीं !
नरेश चंद्रकर, बड़ौदा