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Friday 24 Nov 2017

उत्सव अंक मिला। भारत कई-कई बोली बानी और विभिन्न लोक संस्कृतियों का घर रहा है।

 

उत्सव अंक मिला। भारत कई-कई बोली बानी और विभिन्न लोक संस्कृतियों का घर रहा है। सदियों से उसकी यही पहचान भी रही है। ऐसे समय में जब हमारी लोक संस्कृतियों की पहचान निरंतर क्षरित हो रही है। बोलियां नष्ट होने की कगार पर हैं, शब्द संपदा घट रही है। हम विचारशून्य, निष्क्रिय और दर्शक मात्र रह गए हैं तब अक्षर पर्व का लोक संस्कृतियों पर केन्द्रित उत्सव अंक ठंडी बयार से कम नहीं। अंक लोक वैभव की नयनाभिराम झांकी की तरह है। विभिन्न प्रदेशों की लोक संस्कृति, भाषा, कला, संगीत, साहित्य, इतिहास, लोककथाएं, उत्सव, पर्व की जानकारियां अनिवर्चनीय आनंद और आत्मीयता से भर देती हैं। ज्ञानवद्र्धक एवं संग्रहणीय अंक के लिए साधुवाद।
शिवकुमार अर्चन, 10. प्रियदर्शिनी ऋषि वैली
ई-8, गुलमोहर एक्सटेंशन, भोपाल-462039
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