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Monday 21 May 2018

अक्षर पर्व का नव वर्ष अंक प्राप्त हुआ, आभार।

अक्षर पर्व का नव वर्ष अंक प्राप्त हुआ, आभार। हमेशा की भांति यह अंक भी सम्पूर्ण मनोयोग के साथ पढ़ा। प्रस्तावना के अंतर्गत कवि मलय जी के सद्यप्रकाशित कविता संग्रह -असंभव की आंच  के बहाने आपने उनके व्यक्तित्व और  जीवन संघर्षों पर जो प्रकाश डाला है, उसे पढऩा- समझना  काफी रोमांचक है। 85 वर्ष की उम्र में जिस ऊर्जा के साथ वे अपने रचना कर्म से जुड़े हुए हैं, उसे प्रणाम करते हुए उनके सुदीर्घ-सक्रिय जीवन की कामना करता हूँ।
         अरसे बाद  जयनन्दन जी को पढऩा भी अत्यंत सुखद लगा। उनकी कहानी ने खूब प्रभावित किया। आर्ट का पुल, लड़की बिकाऊ नहीं है, कहानियाँ भी मन पर प्रभाव छोड़ती हैं। बलदेव वंशी, शैलेंद्र, विजेंद्र और प्रेमशंकर रघुवंशी की कवितायें, प्रभाकर चौबे का व्यंग्य तथा भारत यायावर का आलेख अपनी-अपनी तरह से पठनीय और मननीय हैं। श्रेष्ठ सम्पादन के लिए हमारी अशेष शुभकामनायें स्वीकारें।
          जय चक्रवर्ती
मो.-09839665691