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Saturday 25 Nov 2017

रोटी का गीत मधुर होता है

 

 

मिलती है जिसको, चखाते हैं रोटी
बोटी गला कर कमाते हैं रोटी
सूखे ही बस चुपड़ाते हैं रोटी
भूख में वह कुड़कुड़ाते हैं रोटी ।

भूखा तो बस मजबूर होता है
रोटी का गीत मधुर होता है ।।

संगीत की बनती बोल है रोटी
मिहनत की खोलती पोल है रोटी
सभी निर्धन की अनमोल है रोटी
छोटी थाल जैसी गोल है रोटी ।

संगीत का मीत नूपुर होता है
रोटी का गीत मधुर होता है ।।

चांदनी जैसी सफेद है रोटी
कई-कई तरह का भेद है रोटी
न मिलने पर रोजी, खेद है रोटी
गरीबी की ताकत, छेद है रोटी ।
मिलने पर नहीं अवसर खोता है
रोटी का गीत मधुर होता है ।।

अति छोटी हो गयी थाल की रोटी
बन जाती कब है काल की रोटी
कुछ को मिल जाती माल की रोटी
कब छिन जाये नौनिहाल की रोटी ।

नवजात का क्या कसूर होता है
रोटी का गीत मधुर होता है ।।

कुछ बैठ आराम से खाते रोटी
कुछ हैं बहुत कष्ट से पाते रोटी
माल अनेक गड़क कर लाते रोटी
कुछ दूसरों की हड़प जाते रोटी ।

जो मिले, वही प्रचुर होता है
रोटी का गीत मधुर होता है ।।