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Thursday 23 Nov 2017

लोकार्पण समारोह

आरा के बाल हिन्दी पुस्तकालय में देशज, सृजनलोक और प्रगतिशील लेखक संघ, आरा के संयुक्त तत्वावधान में हिन्दी के चर्चित लेखक, कवि, कथाकार और उपन्यासकार डॉ. जनार्दन मिश्र के सद्य: प्रकाशित उपन्यास- ''अपनी गली मेंÓÓ का विधिवत लोकार्पण चर्चित युवा शायर कुमार नयन के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. दीपक कुमार राय थे। गोष्ठी की अध्यक्षता रामनिहाल गुंजन, जगतनंदन सहाय, अनंत कुमार सिंह के द्वारा संयुक्त रूप से की गई। अपने वक्तव्य में डॉ. जनार्दन मिश्र ने कहा कि किसी भी रचनाकार को मोमबत्ती की मानिंद दोनों शिराओं से जलना पड़ता है। यह उपन्यास जो पूर्णत: यथार्थवादी और सौन्दर्यवादी है, ऐसा ही सघन व कठिनतम प्रयास किया गया है। विषय प्रवर्तन करते हुए चर्चित आलोचक जितेन्द्र कुमार ने इस उपन्यास को कई-कई मिथकों को तोडऩे वाला उपन्यास बताया। समीक्षक डॉ.दीपक कुमार राय ने कहा कि यह उपन्यास सिर्फ भोगवादी उपन्यास नहीं है- यह उपन्यास बाजारवाद को लांघते हुए एक नई दिशा की तलाश में संघर्ष करती चिंगारी की तरह अपना रूप ग्रहण करता है।
 चर्चित कहानीकार-उपन्यासकार बनाफरचंद ने इस उपन्यास को सहेजते हुए कहा कि यह उपन्यास ग्रामीण पृष्ठभूमि से उपजा हुआ प्रेम और वासना का सही प्रतिफलन है, जो यह दर्शाता है कि प्रेम और वासना, प्रेम का ही प्रतिफलन है जिन्हें कदापि खंडन नहीं किया जा सकता। प्रगतिशील लेखक संघ आरा की संयुक्त सचिव गायत्री सहाय के द्वारा डॉ. जनार्दन मिश्र के इस उपन्यास को प्रेम-मिलन, पुनर्मिलन, बिछुडऩ और तड़पन से संपृक्त भावभूमि वाला उपन्यास बताया गया। वरिष्ठ माक्र्सवादी आलोचक रामनिहाल गुंजन ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि डॉ. मिश्र का यह उपन्यास एक नवीनतम प्रयोगवादी उपन्यास है। उपन्यास के सभी पात्र स्वत: स्फूर्त हैं और अपनी जमीन के प्रति पूरी मजबूती दिखाते हैं। डॉ. मिश्र ने इस उपन्यास को बड़ी शिद्दत से सजाया-संवारा है। प्रेम-वासना और साधना की ठोस जमीन पर आधारित यह उपन्यास पाठक वर्ग को एक साथ कई-कई हलचलों की ओर ले जाता है कि बाजारवाद और वैश्वीकरण का यह मायावी रूप-प्रतिरूप किसी आमजन के लिए कितना बर्बर और घातक होता है।

अरुण शीतांश
मणि भवन, संकट मोचन नगर, आरा-802301