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Friday 24 Nov 2017

जियो और जीने दो भाई

जियो और जीने दो भाई
चीख रही है
आज आविष्कारों की जननी
क्योंकि मनुज को दानवता ने
स्वारथ के मोटे रस्से से
खींच तान कर बाँध लिया है।
इसीलिए तो अरे
विश्व के हर कोने से
महाकाल के काले बादल
देखो अम्बर चूम रहे हैं
बरस पड़े तो सर्वनाश है
और प्रलय है इसे न भूलो
पंचशील के सिद्धांतों को
अरे चुनौती देने वालों
तुम मनुष्य हो कौन कहेगा
मर जाओगे मर कर मोक्ष नहीं पाओगे
नई सृष्टि में प्रेत बनोगे
मरघट का साम्राज्य मिलेगा
नहीं शांति फिर भी पाओगे
क्योंकि तंत्र विद्या के पंडित
रात दिवाली में आएँगे
नए सिरे से नई खोज के
लिए बाँध कर ले जाएँगे
उस दिन स्वारथ अरे मोक्ष का
दरवाजे पर आ जाएगा
जिस दिन नई सृष्टि का मानव
नया स्वर्ग रे दिखलाएगा
सुनो कर्म के ठेकेदारों
गला न घोंटो उस ईश्वर का
जिसने सृजन समान किया है
हैं समान अधिकार सभी के
इसे न भूलो
द्वार खोल दो दया धर्म के
राह अहिंसा की अपनाओ
क्योंकि सत्य ने आदि काल से
सूली चढ़ कर यही कहा है
- जियो और जीने दो भाई।