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Sunday 22 Sep 2019

जीने का आधार एक है

जीने का आधार एक है
जिससे बोल लिया करता हूँ।
बिना कलम के नित लिखता है
जीवन की रंगीन कहानी
एक पहेली बना हुआ है
स्नेह सिंधु का सारा पानी
वही एक चिर संगी मेरा
जिससे खेल लिया करता हूँ।
जीने का आधार एक है
जिससे बोल लिया करता हूँ।
उसको पाने इस दुनिया के
राजा रंक फकीर भटकते
इस वसुधा से उस अम्बर तक
उठते उठ कर नीचे गिरते
उल्कापात सृष्टि कहती है
किंतु सत्य क्या कह सकता हूँ।
जीने का आधार एक है
जिससे बोल लिया करता हूँ।
चित्रकार की संज्ञा देकर
है जग गाता गीत उसी के
और बनाना और मिटाना
और बनाना काम उसी के
मेरा वह आराध्य सलोना
जीवन दान लिया करता हूँ।
जीने का आधार एक है
जिससे बोल लिया करता हूँ।
गली गली हर डगर डगर में
गाँव गाँव और नगर नगर में
चलता है व्यापार उसी का
बसा हुआ है जो तन मन में
मेरा अपना मीत पुराना
जिससे गीत लिया करता हूँ।
जीने का आधार एक है
जिससे बोल लिया करता हूँ।