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Monday 20 Nov 2017

2) मेहमान

ल्यूशियो के माता पिता ने जाड़़े की छुट्टियों में सैर पर ब्राजील जाने की योजना बनायी। वे ल्यूशियो को कार्सोवेडो, शुगरलोफ और तिजुशा दिखाना, और अपने बच्चे की नजरों के जरिये नजारों को ताजा दृष्टि से सराहना चाहते थे।
    लेेकिन ल्यूशियो जर्मन खसरे से ग्रस्त हो बीमार पड़ गया: यूं तो यह कोई खास तकलीफ  की बात नहीं थी, लेकिन ''उसकी सूरत और भुजाएं दानेदार हो गयी हैं,ÓÓ जैसा कि मां बोली, वह सफर नहीं कर सकेगा।
उन्होंने तय किया उसे अत्यंत शालीन अपनी वयोवृद्ध नौकरानी की देख रेख में घर छोड़ जाएं। विदा होने के पूर्व उन्होंने उसे सुझाया कि बच्चे के शीघ्र ही आने वाले-जन्मदिन के लिए कैण्डल लगा केक खरीद लाना, भले उसके छोटे छोटे दोस्त यहाँ आ उसकी दावत में शामिल न हों: वे जलसे में शिरकत नहीं करेंगे, क्योंकि उनके मन संक्रमण की आशंका से ग्रस्त होंगे ही।
    ल्यूशियो ने माता पिता को यह सोच बखुशी विदा किया कि ये अलविदा उसे अपनी सालगिरह के नजदीक लायेगी जो उसके मन में खासमखास सूरत अख्तियार कर चुुकी थी। उसका मन रखने के मद्देनजर, यद्यपि उसे इसकी दरकार नहीं होगी- फिर भी माता पिता ने वादा किया कि वे उसे तितलियों के परों से सृजित कार्सोवेडो का एक खूबसूरत चित्रांकन, हत्थे पर शुगरलोफ  का नजारा उकेरा हुआ एक काष्ट चाकू, और खजूर के पेड़ों से भरे रिओ-डी-जेनेरिओ के बेहद खूबसूरत या अपनी अत्यंत सुन्दर लाल धरती से भरे ब्रासिलिया के अतीव मनोहारी स्थलों को देखने के लिए एक दूरबीन ला देंगे।
    ल्यूशियो की उम्मीदों को हरा कर रहा जन्मदिन आने में देरी कर रहा था। मायूसी के घने बादल उसके आगमन को बाधित कर रहे थे, तथापि अन्य सुबहों से काफी भिन्न एक सुबह छ: मोमबत्तियां लगा केक (जिसे नौकरानी, मालकिन की हिदायतें मान, लायी थी) ल्यूशियो के कक्ष में रखी मेज पर अंतत: आ चमका। इसके अतिरिक्त, घर के अव्वल दरवाजे पर, माता पिता द्वारा ला छोड़ी गई पीताभ रंग की एक नई बाइसिकल चिलक उठी।
    बेफिजूल इंतजार से झल्ला उठना, बेशक, लाजमी है: बात यह हुई कि मोमबत्तियां जला जन्मदिन मना डालने की त्वरा के वश नौकरानी ने केक का मजा लंच के अनंतर ही उठाना चाहा, लेकिन ल्यूशियो भड़क उठा , बोला कि उसके मेहमान अपरान्ह ही आएंगे।
    ''अपरान्ह में केक खाने से बदहजमी हो जायेगी; जैसे संतरा सुबह माशाअल्लाह, दोपहर माकूल, जबकि रात में खतरनाक हो जाता है। मेहमान नहीं आएंगे-नौकरानी ने कहा; छूत लगने के अंदेशे से घिरी उनकी मांएं उन्हें नहीं आने देंगी। तुम्हारी मां को उन्होंने पहले ही आगाह कर दिया था।
ल्यूशियो ने उसकी चेतावनी खारिज कर दी। थोड़ी बहुत तकरार चली न चली कि नौकरानी को थाम देने के इरादे बालक ने चुप्पी साध ली।
स्त्री ने तो कुछ पल झपकी ली जबकि बालक खिड़की के किनारे ही बाट जोहता बैठा रहा।
पाँच बजे दरवाजे पर दस्तक हुई। नौकरानी खोलने को लपकी, यह सोच कि दूध-ब्रेड बाँटने की फेरी लगा रहा छोरा होगा या डाकिया। जबकि ल्यूशियो ने जान लिया - वहां निसंदेह उसके मेहमान हैं। दर्पण में अपना चेहरा देखते हुए उसने बाल संवारे, नये जूते पहन अपने हाथ साफ  किये। अधीर लड़कियों की एक टोली अपनी मांओं के साथ द्वार पर खड़ी थी।
''मेहमानों में लड़का एक भी नहीं, कितना विचित्र!ÓÓ नौकरानी भौंचक हुई।  ''तुम्हारा क्या नाम है?ÓÓ उसने अन्यों से ज्यादा साफ सुथरी लग रही किसी लड़की से पूछा।
''लिविया।ÓÓ वह बोली।
दूसरी सभी अपना अपना नाम बोलती हुई तत्क्षण भीतर घुस आयीं।
''आप लोग भी अंदर आकर बैठ जाइए,ÓÓ नौकरानी ने बाहर खड़ी मांओं से कहा; वे फौरन लपक आयीं।
सबके भीतर आने तक ल्यूशियो द्वार पर ठिठका, फिर शनै: शनै: कमरे की ओर बढ़ा। वह कुछ ज्यादा ही वयस्क दिखायी दिया! एक के पीछे एक चलती लड़कियों की आंखों को, उनके हाथ पैरों को- एक कदम पीछे खड़े हो- बेहतर ढंग से लखते हुए उसने उनका अभिवादन किया।
एलिशिया खूब कसी हुई ऊनी पोषाक, और कशीदा कढ़ी कोई बेहद पुराने फैशन की टोपी पहनी हुई थी। बुढिय़ा समान दिख रही वह, अपनी देह से कपूर की गंध बिखेर रही वह जैसे ही जेब से रूमाल निकालने लगी कतिपय पतिंगे बाहर आ गिरे; हालांकि उसने उन्हें समेट पुन: जेब में डाल लिया। वह, बेशक अकालप्रौढ़ थी क्योंकि उसके चेहरे पर इर्द गिर्द घट रही समूची हलचल से उभरी विकलता का प्रगाढ़ भाव नजर आ रहा था। अपने बालों की चोटी बांधे फीतों को खींच रही अन्य लड़कियों से परेशान वह भुजाओं में ही कसकर दबाये पैकेट बाबत भी चिंतित हुई कि जिसे दूसरी जगह नहीं रख रही थी। उस पैकेट में सालगिरह का ऐसा तोहफा था जिसे बेचारा ल्यूशियो कदापि नहीं पाएगा।
लीविया बड़ी उल्लसित थी। उसकी चितवनें बैटरी संचालित किसी गुडिय़ा समान- चमकती बुझतीं। उमंग से सराबोर जबकि उतनी ही सहृदय, वह ल्यूशियो को गले लगा, किनारे खींच - उसके लिए लायी भेंट के बारे में - कोई भेद बताने लगी। वह क्यों कुछ बोले: बात का खुलासा, ल्यूशियो के अतिरिक्त हर किसी के लिए बेतुका, अन्यों पर खिल्ली उड़ाने का भाव लिया हुआ लगा। ल्यूशियो द्वारा उस छोटे बक्से को बेहद धीरे धीरे खोलने के उद्यम से बेचैन लीविया स्वयं बक्से को खोलने लगी: वहाँ दो बेडौल चुंबकीय गुडिय़ाएं थी जो परस्पर लिपटतीं, चूमतीं; फिर जब वे एक दूसरे से दूर होतीं, उनकी गरदने तनतीं। बड़ी लम्बी देर तक उस छोटी लड़की ने ल्यूशियो को गुडिय़ाओं का खेल इस तरह चलाना बताया कि उनकी भंगिमाएं ज्यादा बढिय़ा, ज्यादा शानदार,ज्यादा अनोखी हों। बक्से के भीतर सिसकारती निकालता एक तीतर और एक हरा मगर भी था।
तोहफा -यूँ कहें कि लड़की का जंतर मंतर -ल्यूशियो को मोहित कर गया। उसने टोली की अन्य लड़कियों को छोड़, गुडिय़ाओं और लीविया के साथ घर के किसी कोने में अपने को बसा लिया।
छिले हुए घुटनों पर फटा स्कर्ट पहनी, मु_ियां तानी, होंठ सिकोड़ी इरमा ने - ल्यूशियो द्वारा रची दावत के ढंग , और फुसफुसा रही उल्लसित लड़की के तोहफे को तरजीह दे रहे उसके व्यवहार से क्षुब्ध हो मर्दानी ताकत लगा ल्यूशियो के चेहरे पर झापड़ कस दिया, और ऊपर से तीतर तथा मगर को ठोकर मार टुकड़े टुकड़े कर दिया; तत्क्षण लड़की की माँएं(कि जो, नौकरानी के अनुसार, ढोंगी थीं) ऐसे महत्वपूर्ण दिन घटी इस तबाही पर अफसोस जताने लगीं।
नौकरानी ने केक के ऊपर मोमबत्तियाँ जलायीं और परदे खींच दिए ताकि चिरागों की भेदभरी रोशनी ज्यादा ही प्रखरता से चमके। क्षणिक मौन ने अनुष्ठान को जीवंत बना दिया लेकिन फिर भी ल्यूशियो ने न केक काटा, न मोमबत्तियाँ बुझायीं- कि जो रिवाज के मद्देनजर जरूरी था। तभी एक बखेड़ा हुआ। मिलोना ने केक पर चाकू चला दिया और एलविरा ने मोमबत्तियाँ बुझा दीं।
    फीतों और गोटा-किनारों से सज्जित ऑरगेन्डी का सूट पहनी एंजेला दूर खड़ी कांप गयी। उसने केक पर चढ़ी मिठाई का तिनका छुआ तक नहीं बल्कि उसकी ओर देखा भी नहीं; उसके अपने घर, जैसा उसने बोला, तरह तरह के बर्थडे केक अत्यंत नयनाभिराम होते, ललचाते भी। उसने चाकलेट से भरा प्याला भी नहीं छुआ क्योंकि उस पर मलाई आ जमी थी; जब छन्नी लायी गयी तो उसने अपमानित महसूस किया ; बोली वह कोई बच्ची नहीं है। उसने प्याला फर्श पर उलटा दिया। उसने ल्यूशियो और दो लड़कियों- जिन्होंने उसे खरोंच दिया होगा- के बीच चल रहे झगड़े पर या तो ध्यान नहीं दिया या नजरअंदाजी की नकाब ओढ़ी; वह इरमा से ज्यादा ताकतवर होगी, या ऐसा उसने कहा, और ना ही मिलोना और एल्विरा द्वारा भड़काए बतंगड़ पर गौर किया, क्योंकि, जैसा कि उसने बताया कि घटिया दावतों में सिर्फ  मूर्ख लोग ही जाते हैं, उसे तो अन्य मनोहर जन्मदिनों की याद करना ही अच्छा लगता है।
    ''अगर वे किसी से बात करना नहीं चाह रही है, अपने ही में मगन हैं, इतने प्यार से बनाए गए पकवानों पर हिकारती नजरें डाल रही हैं तो ये लड़कियाँ दावतों में क्यों आती हैं? भले छोटी लड़कियाँ हों वे पार्टियों की जूठन-चटोरियाँ हैं,ÓÓ आहत नौकरानी ने एलिशिया की माँ से अपनी व्यथा जाहिर की।
    ''बेवजह विकल होने की जरूरत नहीं,ÓÓ स्त्री ने जवाब दिया, ''सभी एक जैसी होती हैं।ÓÓ
    ''विकल क्यों न होंऊँ! उनमें खासी ताकत है: अपना जन्मदिवस न होने पर भी उन्होंने मोमबत्तियाँ बुझा दीं और केक काट डाला।ÓÓ
     मिलोना बेहद गुलाबी पड़ गयी।
    ''मुझे उसे कुछ खिलाने में जरा अड़चन नहीं होती,ÓÓ उसकी मां अपने होंठ चाटती हुई फिर बोली, ''उसे गुडिय़ा या किताबें दे बहकाने की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि वह उनकी ओर देखती तक नहीं। वह तो कैण्डी और पैस्ट्री ही मांगती है। उसे तो बेल के साधारण मुरब्बे ही में बड़ा मजा आ जाता है। उसका मनपसंद खेल-चाट मिठाई खाना ही है।ÓÓ
    एल्विरा बेहद बदसूरत थी।
    काले काले तेलिया बाल उसके चेहरे पर आ छाते। वह किसी चीज़ पर सीधी दृष्टि कभी नहीं डाल पाती। जैतून के जैसा हरा रंग उसके गालों पर बसा था; बेशक उसका यकृत रोगग्रस्त होगा। एकमात्र तोहफे को मेज पर अभी तक रखा हुआ देख उसने तीखी हँसी बिखेरी।
''तोहफों में भद्दी चीजें रखने वालों को सजा मिलनी चाहिए। ठीक बात है न मम्मी ?ÓÓ उसने अपनी मां से कहा। मेज के निकट से गुजरते, अपनी लंबी चोटियों से दो गुडिय़ाओं को फर्श पर गिराने में कामयाब हो गयी, जहां वे दूर होतीं फिर परस्पर मिलती चूमती गयी।
''टेरेसा, टेरेसा,ÓÓ मेहमान चिल्लाये। टेरेसा ने कोई जवाब नहीं दिया; एंजिला के समान ही बेरूख तो बेरूख उलटी सीधी बैठी उसने अपनी आँखें यदाकदा ही खोली होंगी। उसकी माँ बोली वह उनींदी है: उसे नींद का रोग है। अकसर सोयी रहती है।
    ''वह तो खेलते खेलते भी सोती है। यह बढिय़ा बात है क्योंकि उससे मैं शांति से अपना काम करती रहती हूँ,ÓÓ माँ ने बात आगे बढ़ायी।
टेरेसा सर्वथा बदसूरत नहीं थी; कई दफा हमदिल तक नजर आयी, लेकिन अन्य लड़कियों के साथ तुलना करने पर खूँखार हो जाती। भारी पलकें और दोहरी ठुड्डी ली हुई (जो कि उसकी आयु के मान से अनुपयुक्त होगा) वह यदाकदा बड़ी भली नजर आती लेकिन यह मुगालता फौरन काफूर हो जाता कि जब एक दफा किसी लड़की के फर्श पर गिरते वह उसकी मदद के लिए जरा न हिली, बल्कि अपनी कुर्सी ही में कराहती हुई, छत को ताकती हुई, तनकर बैठी हुई बोली वह थकी हुई है।
''कैसी बर्थडे पार्टी,ÓÓ सिलसिला खत्म होने पर नौकरानी सोचने लगी। '' केवल एक मेहमान तोहफा लाया; उसका जो हश्र हुआ क्या कहें! कोई एक तो प्राय: समूचा केक खा गयी; किसी दूसरी ने खिलौने तोड़े और ल्यूशियो को चोट पहुंचायी, जबकि तीसरी अपना लाया हुआ तोहफा वापस ले गयी; फिर किसी अन्य ने ऐसी भद्दी बातें की जिन्हें उम्रयाफ्ता लोग यदाकदा वापरते होंगे; ऊपर से फूला चेहरा बनाये क्या लौटी कि मुझे गुडबाई भी नहीं किया; तो कोई अन्य-अपने बेदम अंगों को लहराती- किसी पुलटिस समान चेहरा बनायी एक कोने ही में सिमटी रही; और वो, हाँ वो (क्या नाम उसका! मेरे ख्याल से एलविरा होगी), कि जिसका वाइपर जैसा चेहरा यूँ नजर आया मानो कोई अनहोनी होने वाली हो; हालाँकि, मेरे ख्याल से ल्यूशियो उनमें से किसी एक के, जो तोहफा लायी थी, के प्रति आसक्त हुआ, महज स्वार्थवश। उसे मालूम होगा सुन्दर हुए बगैर लड़कों का मन कैसे जीत ले। स्त्रियाँ, पुरूषों से भी बद्तर हैं। सब कुछ कितना बकवास है।ÓÓ ल्यूशियो के माता पिता जब सैर से लौटे वे कदापि नहीं खोज पाये लड़के के जन्मदिन पर आयीं लड़कियाँ कौन थीं, उन्होंने सोचा उनके लड़के के भेद भरे संबंध हैं, जो, शायद अभी तक भी, हकीकत हैं। ल्ेकिन तब तक ल्यूशियो अल्पायु प्रौढ़ हो गया था।