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Sunday 19 Nov 2017

अक्षरपर्व जुलाई अंक में शोधपत्र के अंतर्गत राम द्वारा बाली का वध- विभिन्न रामायणों के संदर्भ से, ने ध्यान खींचा।

 

चंद्रसेन विराट, 121, बैकुंठधाम कालोनी, आनंद बाजार के पीछे, इन्दौर-452018

अक्षरपर्व जुलाई अंक में शोधपत्र के अंतर्गत राम द्वारा बाली का वध- विभिन्न रामायणों के संदर्भ से, ने ध्यान  खींचा। बालीवध, शंबूक वध एवं सीता त्याग के प्रसंग रामचरित्र पर प्रश्नचिह्नï बनकर शुरु से चिपके रहे हैं। बालीवध पर शोधपत्र ने पर्याप्त प्रकाश डाला है। विभिन्न रामायणों में वर्णित कथा उद्धृत की है एवं छिपकर बाण मारने की तर्कों द्वारा पुष्टि की गई है, तथापि पूर्णसंतोष किसी तर्क से नहींहो पाता। भगवान विष्णुु ने अपने अवतारों में ऐसे नाजुक प्रसंगों में तथाकथित छल का उपयोग कर सृष्टि  की दानवों से रक्षा की है। जलंधर प्रसंग भुलाया नहींजा सकता। बाली की वरद माला के प्रभाव की रक्षा करते हुए यह सृष्टि के हित में सात्विक छल प्रतीत होता है। यह भी उल्लेख है कि राम ने बाली को संमुख युद्ध में पराजित किया था, किंतु तब उस वरदमाला का उल्लेख नहींआता। शोधार्थी ने अपनी ओर से कोई सर्वमान्य अथवा व्यक्तिगत निष्कर्ष प्रस्तुत नहीं किया है और विभिन्न मतों, तर्कों का विशद वर्णन करके प्रसंग समाप्त कर दिया है।