Monthly Magzine
Friday 22 Jun 2018

\'अक्षर पर्वÓ नियमित मिल रहा है। पूर्णांक 181 (अक्टूबर 2014) भी। सधन्यवाद आभार।

प्रो. भगवानदास जैन, अहमदाबाद (गुजरात) 82445

'अक्षर पर्व' नियमित मिल रहा है। पूर्णांक 181 (अक्टूबर 2014) भी। सधन्यवाद आभार। अंक वैविध्यपूर्ण विपुल स्तरीय सामग्री से सुसमृद्ध है। विविध प्रकार की काव्य विधाएं पढ़कर  हृदय रसाप्लावित हो गया है। अशोक मि•ााज का गल विषयक आलेख अच्छा है, पठनीय है। चुटीले व्यंग्य के लिए दोनों ही व्यंग्यकार यश मालवीय व केवल गोस्वामी की लेखनीय अभिनंदनीय है। 'अक्षर पर्वÓ की प्रस्तावना और उपसंहार तो लाजवाब है। पिछले तकरीबन दो दशकों से 'अक्षर पर्वÓ अपनी अद्भुत और अनुपम साहित्यिक सामग्री से पाठकों का मनोरंजन और ज्ञानवद्र्धन कर रही है। आज तो यह देश की एक ऐसी स्तरीय पत्रिका के रूप में सुनिश्चित हो चुकी है जो पठनीय भी है और दर्शनीय भी।