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Saturday 18 Nov 2017

महात्मा गांधी के शिक्षा संबंधी प्रयोग

अमृत अर्णव
अहिंसा एवं शांति अध्ययन विभाग
म.गां.अं.हिं.वि. वर्धा
महात्मा गांधी के शिक्षा दर्शन में रचनात्मक कार्यक्रम का विशेष महत्व था और अपने जीवन के अंतिम दिनों में जो दस्तावेज उन्होंने देश को सौंपा उसमें रचनात्मक कार्यक्रम के आधार पर नए समाज की रचना का संदेश था।  फिनिक्स आश्रम और टाल्स्टाय फार्म में गांधी जी का शिक्षा दर्शन केवल राष्ट्रीय सीमाओं में ही बँधा नहीं था बल्कि उन्होंने बुनियादी शिक्षा का प्रतिपादन करते हुए कहा था कि इसके पीछे सत्य और अहिंसा का सिद्धान्त निहित है।1
महात्मा गांधीजी के जीवन दर्शन में ईश्वर और आध्यात्मिकता को प्रमुख स्थान दिया गया इसलिए शिक्षा दर्शन में उन तत्वों को प्रधानता दी गई। गांधीजी के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण करना हैं। इसके अन्तर्गत वे आध्यात्मिक, मानसिक तथा शारीरिक विकास अर्थात जीवन के सभी पक्षों पर बल देते हैं। शिक्षा का उद्देश्य गांधीजी के लिए नौकरी पाना नहीं था वे बच्चों को स्वावलंबी बनाना चाहते थे।2
गांधीजी के शिक्षा पर प्रयोग या दर्शन पर प्रभाव की समीक्षा करना न्याय संगत है। गांधी के फिनिक्स आश्रम, टाल्स्टाय फार्म आदि सभी स्थानों पर शिक्षा संबंधी प्रयोग किये। गांधी जी संस्था या आश्रम चलाकर छोड़ नहीं देते थे उन्होंने फिनिक्स आश्रम के उद्देश्यों के बारे में वर्णन किया था कि विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण करना सर्वोपरि लक्ष्य है, साथ ही उन्होंने कहा था कि वास्तविक शिक्षा वह है जो बच्चों को सीखने की कला सिखाये। दूसरे शब्दों में शिक्षा से ज्ञान की जिज्ञासा जागृत होनी चाहिए। गांधीजी आत्मा को शिक्षित करने का बड़ा महत्व देते थे उनका विचार था कि आत्मशिक्षण शिक्षा का स्वतंत्र विषय है। उनकी दृष्टि में आत्मा का विकास, ईश्वर का ज्ञान प्राप्त करना, आत्मज्ञान प्राप्त करना। आश्रम के माध्यम से उन्होंने शिक्षा पर नैतिक शिक्षा को महत्त्व दिया था। शिक्षा में स्वावलम्बन आत्मनिर्भता की शिक्षा है और वही सबसे बड़ा धर्म और सबसे बड़ा कर्म है। गांधी ने फिनिक्स आश्रम और टाल्स्टाय फार्म में सत्याग्रह की शिक्षा को वास्तव में शिक्षा कहा। अर्थात बच्चों को प्रारंभ से ही सत्य के प्रति आग्रह की शिक्षा देनी चाहिए। उसमें सत्य, प्रेम और अहिंसा का आचरण निहित हो।3
गांधी के अनुसार सा विद्या या विमुक्ते अर्थात जो मुक्ति के योग बनाए वही विधा है। गांधी ने फिनिक्स आश्रम और टाल्स्टाय फार्म में यह अनुभव किया कि प्रचलित शिक्षा में परिवर्तन लाये बिना नये समाज की कल्पना करना व्यर्थ है। अत:उन्होंने एक नई शिक्षा का आविष्कार किया जिसमें शोषण, परतंत्रता और विषमता को दूर कर अहिंसक समाज का निर्माण किया जा सके, वह है बुनियादी तालीम। फिनिक्स आश्रम और टाल्स्टाय फार्म में उन्होंने निम्न शिक्षा संबंधी प्रयोग बच्चों पर किए। 1.हृदय और संस्कृति के बारे में पढ़ा जाना चाहिए। 2. चरित्र निर्माण पर ज्यादा बल। 3. छात्र प्रयोग के माध्यम से सीखें। 4. आश्रम में छात्र मित्रतापूर्वक रहे। 5. नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देकर। 6. लड़के-लड़की एक साथ पढ़े। 7. धार्मिक सेमिनार करके।4
वे कहते थे, एक छोटी सी कुदाली और फावड़ा हमें बहुत बड़ी गंदगी से बचा सकता है चलने के रास्तों पर मैला डालना, थूकना और नाक साफ  करना ईश्वर के प्रति और मनुष्य के प्रति पाप है। सेवा भाव की शिक्षा टाल्स्टाय फार्म और फिनिक्स आश्रम की ही देन है। टाल्स्टाय फार्म और फिनिक्स आश्रम में बताया गया कि पाठ्य पुस्तकों से पढ़कर ही नहीं, बल्ति अनुभवों से भी सीखा जा सकता है। अनुभव के माध्यम से, उससे जो सीखेंगे उस पर प्रयोग करके हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। गांधीजी ऐसी शिक्षा पर जोर देते थे जिसमें हृदय परिवर्तन हो जाए। टाल्स्टाय फार्म और फिनिक्स आश्रम में जो भी शिक्षा संबंधी प्रयोग हुए वे व्यर्थ नहीं गए। इसके फलस्वरूप बालकों में कभी असहिष्णुता की भावना पैदा नहीं हुई। वे एक दूसरे के धर्म के प्रति और एक-दूसरे के रीति-रिवाजों के प्रति उदारता रखना सीखें, सभ्यता सीखें, उद्यमी बने, यही इनका लक्ष्य था।5
फिनिक्स आश्रम और टाल्स्टाय फार्म के जो अत्यंत मीठे संस्मरण हैं, उनमें शिक्षण के प्रयोग के संस्मरण कम मीठे नहीं है। टाल्स्टाय फार्म में बच्चे एक दूसरे की दाढ़ी बना देते थे और बाल भी काट देते थे। सत्याग्रह के लिए फिनिक्स आश्रम और टाल्स्टाय फार्म शुद्धि का और तपश्चर्या का स्थान सिद्ध हुए। महात्मा गांधी के अनुसार शिक्षा की प्रगति में एक चीज रूकावट डालती है। शिक्षक के बिना शिक्षा ला ही नहीं जा सकती। यह वहम समाज की वृद्धि को रोक रहा है। मनुष्य का सच्चा शिक्षक वह खुद है। अन्टू द लास्ट के अध्ययन ;1909 के बाद महात्मा गांधी ने बालकों में ज्ञान के साथ श्रम का स्थान दिया। शिक्षा क्रम में उन्होंने कताई, बुनाई, बढ़ईगिरी, खेती, बागवानी, चमड़े का काम आदि उद्योग को मुख्य माना। उनके अनुसार बच्चे घर में स्वाभाविक रूप से जो स्वत: सीख जाते हैं वह सीखाने पर भी नहीं सीख पाते।6 गांधी के जीवन दर्शन पर उपनिषदों का प्रभाव था उनके अनुसार सच्ची शिक्षा वही है जो मोक्ष की ओर ले जाए, मुक्ति की और ले जाए। उनके अनुसार एक अच्छी किताब एक अच्छा शिक्षक है। विषय का माध्यम ऐसा होना चाहिए जो पढऩे में रोचक लगे। महात्मा गांधी शिक्षा को स्वावलम्बन का प्रतीक मानते थे। वे मानते थे कि शिक्षा  में मन, मस्तिष्क और हृदय का तालमेल होना चाहिए जिससे विद्यार्थी का जीवन शिक्षा ग्रहण करने के बाद सुखमय स्मृति से सम्पन्न हो सके।7
अत: वर्तमान समय में जो शिक्षा संबंधी कई दोष हैं उन्हें हम फिनिक्स आश्रम और टाल्सटाय फार्म में गांधी जी के शिक्षा संबंधी जो प्रयोग हुए हैं उन्हें अपनाकर दूर कर सकते हैं।
संदर्भ सूची
1.    सिंह रामजी, गांधी ज्योति, गांधी विचार पत्रिका, गांधी विचार विभाग, भागलपुर, 1985 पृ. 29
2.   Gandhi M. K. Ashram Observances नवजीवन हाउस अहमदाबाद, तृतीय संस्करण, 2006, पृ. 58
3.    वही, पृ. 9, 60
4.   Gandhi M. K. Edited, Bhartan Kumarappa नवजीवन हाउस, अहमदाबाद, सातवां, संस्करण, 2001 पृ. 39, 48
5.    गांधी, महात्मा सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा, सस्ता साहित्य मण्डल प्रकाशन, सातवां संस्करण, 2005, पृ. 247, 248
6.    वही, पृ. 275, 276
7.    वही, पृ. 278, 279, 280 ठ्ठ