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Wednesday 22 Nov 2017

भ्रष्टाचार-हेल्प लाइन


प्रभाकर चौबे
शुक्ला प्रोविजन स्टोर्स के पास
रोहिणीपुरम, रायपुर (छ.ग.) 492010
मो. 094255-15633
मिडिल क्लास का आदमी मेंढक के स्वभाव का होता है। जरा सा पानी गिरा और खुशी से टर्राने लगा- पानी बंद हुआ तो दुखी होकर धरती के कई फीट नीचे चला गया। एक जमाने में सिगरेट का दाम एक पैसा कम हुआ और मिडिल क्लास खुश। बजट के दिन उसका ध्यान सिगरेट की कीमत और आयकर के स्लैब पर रहता। आज ए.सी. का किराया नहीं बढऩे पर चेहरा खिल जाता है। ए.सी. का किराया बढ़ा और सरकार को कोसने लगता है। गुस्सा सिर पर उठाए रखता है और दिन में जो सामने आ जाए उसी के सामने गुस्सा उड़ेल देता है- देखा, देखा इस सरकार को। इस सरकार को अब जाना चाहिए। बढ़ा दिया एस.सी. टू और थ्री का किराया। आम आदमी पर ही सारा बोझ। महंगाई में यूं ही मर रहा है आम आदमी। मिडिल क्लास की चिंता नहीं सरकार को। जो भी थोपना है मिडिल क्लास पर थोप दो। देश का मिडिल क्लास गांव के मकान की बाहरी दीवार है जिस पर कंडा थोपा जा सकता है। इस तरह वह अपनी भड़ास निकालता है। ऑफिस में टी टाइम में ए.सी. किराए को लेकर आधा घंटा प्रवचन दे देता है।
''आप ए.सी. टू में चलते हैं।ÓÓ
''नहीं, थ्री में।ÓÓ
''थ्री का भी तो किराया बढ़ा दिया है।ÓÓ
''हां यार। सरकार मिडिल क्लास के पीछे पड़ गई है।ÓÓ
''अब थ्री टियर में सफर करना होगा।ÓÓ
''थ्री टियर में गंदगी होने लगी है। यार ए.सी. थ्री में चलते रहे, अब सरकार ने उसका किराया बढ़ा दिया। सरकार को पसंद नहीं कि हम जरा-सी सुविधा पा लें। सारी सुविधा ऊंचे लोग उठाएं।ÓÓ
''हां देखो न, मंत्रियों को, पार्लियामेंट के सदस्यों को हवाई यात्रा का किराया सरकार देती है।ÓÓ
''हां, जितना किराया बढ़े, उनकी जेब से जाना नहीं है इसलिए उन्हें चिंता नहीं है।ÓÓ
''चलें यार, टेबल पर फाइलें पड़ी हैं।ÓÓ
इस तरह केंटिन में गुस्सा निकालकर शाम घर आने पर घर में कुछ गुस्सा निकाल लिया जाता है। फिर टी.वी. पर किराया बढऩे को लेकर की जा रही चर्चा सुनकर मिडिल क्लास का आदमी संतोष पा लेता है कि सरकार की अच्छी खिंचाई हो रही है।
हमारे मित्र तिवारी जी हमारी तरह ही मिडिल क्लास से हैं इसलिए हम दोनों में खूब पटती है। दोनों एक ही विचारधारा के हैं कि जो सरकार सिगरेट, ए.सी., गैस, पेट्रोल, रसोई गैस की कीमत बढ़ाए उसे जाना चाहिए। सब सस्ता करने वाली सरकार आए जिससे हम मौज करें। हम दोनों ही गरीबों को दी जाने वाली किसी भी तरह की सब्सिडी के खिलाफ हैं- कमाए मिडिल क्लास। टैक्स दे मिडिल क्लास और सब्सिडी पाए गरीब क्लास। हम भ्रष्टाचार से भी त्रस्त हैं। भ्रष्टाचार जाए, चाहे जिसे राज करना हो करे। उस दिन तिवारी जी घर पहुंचे। अपना स्कूटर खड़ा कर घर के अंदर घुसे। चेहरा तमतमाया हुआ।
पत्नी ने पूछा- ''का आय हो गओ।ÓÓ
तिवारी जी गुस्से में थे, गुस्से में बोले- ''उसे देखो, पी.एफ. से लोन निकलवाने के लिए पांच हजार मांग रहा है।ÓÓ
''कौनÓÓ पत्नी ने पूछा।
''और कौन। बाबू, और कौन। कहता है साहब को भी देना पड़ता है। जैसे हमें पता न हो कि साहब को भी देना पड़ता है। चपरासी को भी देना पड़ता है। लेकिन पांच हजार? हद कर दी। पिछली मर्तबा पांच सौ में काम कर दिया था। अब कह रहा है कि महंगाई बढ़ी है- पेट्रोल महंगा हो गया। ए.सी. का किराया बढ़ गया। बच्चे की फीस दुगुनी हो गई। इन्कम टैक्स में छूट मिली, प्रोफेशनल टैक्स बंद हुआ लेकिन दिगर खर्च तो बढ़ गए इसलिए पांच हजार रेट चला दिया।
पत्नी ने कहा- ''अंधेर है। तुम भी तो रहे हो उस सेक्शन में, इतना कहां लेते रहे।ÓÓ तिवारी ने कहा- ''हम तो पचास में काम कर देते थे। उन दिनों पचास रुपया भी ज्यादा लगता था।ÓÓ
''तो अब क्या करोगे।ÓÓ पत्नी ने पूछा।
''यही सोच रहे हैं। पांच हजार दें कि न दें। न दें तो क्या करें।ÓÓ तिवारी जी बोले।
अचानक उनकी पत्नी का चेहरा चमक उठा, बोलीं- ''इसकी शिकायत भ्रष्टाचार सेल में काय नहीं कर देते।ÓÓ
तिवारी जी समझे नहीं। पत्नी का मुंह ताकने लगे जैसे मेंढक सामने के डबरा को निहारता है।
पत्नी ने कहा- ''ऐसो का आय देख रहे।ÓÓ
''तुम का कह रही, हम समझ नहीं पा रहे।ÓÓ तिवारी जी ने कहा।
''अरे हम कह रहे हैं कि इसकी शिकायत भ्रष्टाचार सेल में कर दो। समझे।ÓÓ
''कैसेÓÓ तिवारी जी ने पूछा।
''आज का अखबार नहीं पढ़ा। उसमें हेल्पलाइन दई गई है और लिखो हे कि कोई घूस मांगे तो दओ गओ नम्बर में रिंग कर सूचना दें।ÓÓ तिवारी जी ने कहा- ''लाना आज का पेपर।ÓÓ
पत्नी ने पेपर लाकर दिया। तिवारी जी ने समाचार पढ़ा। समझा। दिया हुआ नम्बर देखा। समझा। फिर बोले- ''तुमने अच्छी जानकारी दई। हम अब्बी लगाते हैं नंबर और शिकायत करते हैं कि भविष्य निधि से लोन निकलवाने के लिए फलां इंचार्ज बाबू पांच हजार की घूस मांग रहा है। लाना टेलीफोन, इधर सरकाना।ÓÓ
और तिवारीजी ने अखबार सामने रखा। उसमें दिया गया फोन नंबर देखा। उस पर फोन लगाया।
हुआ ये कि 15 मिनट तक तिवारी जी फोन के बटन दबाते रहे- कभी ये नंबर, कभी वो नंबर। पत्नी उनका मुंह ताकती रही। एकाध बार पूछने की कोशिश की कि जो का हो रहो... लेकिन तिवारी जी ने हाथ के इशारे से पत्नी को चुप रहने कहा। पन्द्रह मिनट बाद तिवारी जी ने टेलीफोन का चोंगा जोर से टेलीफोन पर पटका। टेलीफोन एक ओर सरका दिया।
''पसीना-पसीना हुए जा रहे हो। का हो गओ।ÓÓ पत्नी ने कहा। ''मुंह एकदम लाल हो गओ... डॉक्टर को बुलाएं का।ÓÓ पत्नी ने चिंता जाहिर की।
''डॉक्टर क्या करेगा। क्या कर लेगा। जांच के पांच सौ लेगा और कहो आगे और जांच के लिए कहे जिसमें दो-तीन हजार खर्च करो। तुम एक गिलास पानी लाओ।ÓÓ पत्नी पानी लेकर आई। पानी दिया और पूछा- ''टेलीफोन में तुमने एको बात नइ करी। भओ का... कछु बताहो। बस टेलीफोन के बटन दबाते रहे।ÓÓ
''बटन दबाने के सिवाय और कुछ करना ही नहीं था।ÓÓ तिवारी जी ने कहा।
''मतलबÓÓ पत्नी ने पूछा।
''मतलब जो कि हमने दओ गओ नम्बर पर फोन करो तो हमने समझो कोई फोन उठेहे तो बतेहें। लेकिन उधर से आवाज आई- ''अंग्रेजी में बताना है तो एक नंबर दबाइए। हिन्दी में बताना है तो दो नंबर बताइए।ÓÓ हमने दो नंबर दबाओ। उधर से आवाज आई। ''कम्पलेंट का नेचर बताना हो तो चार नंबर दबाइए। घटना घट चुकी हो तो पांच नंबर दबाइए।ÓÓ हमने चार नंबर दबाओ। उधर से आवाज आई- ''अगर घूस की रकम सौ रुपए हो तो छ: नम्बर दबाइए। एक सौ एक से चार पांच सौ तक की रकम हो तो सात नंबर दबाइए। पांच सौ से ज्यादा लेकिन दस हजार से कम तक की रकम हो तो आठ नंबर दबाइए।ÓÓ
हमने आठ नंबर दबाओ। उधर से आवाज आई- ''आपकी शिकायत दर्ज हो गई है। अपना नाम बताने के लिए शून्य दबाइए।ÓÓ
''हमने शून्य दबा दौ।ÓÓ तिवारी जी ने बताया।
फिर उधर से आवाज आई- ''जिसने घूस मांगी उसका नाम बताने के लिए दो और तीन एक साथ दबाइए।ÓÓ हम सोचने लगे। घूस मांगने वाले का नाम तो पता नहीं। हम सोच ही रहे थे कि टेलीफोन बंद हो गया। घर्र-घर्र करने लगा। हमने फिर नंबर लगाया। उधर से फिर कहा गया कि ''अंग्रेजी में बताना हो तो एक नंबर दबाइए। हिन्दी में बताना हो तो दो नम्बर दबाइए।ÓÓ हमने दो नंबर दबाया। उधर से आवाज आई कम्पनेंट का नेचर बताना हो तो तीन नंबर दबाइए। अगर घटना घट चुकी हो तो चार नंबर दबाइए। हमने ऐसा ही किया... ''अब का बताएं हमने फिर वही वही किया जो पहले करते रहे और फिर वही कि टेलीफोन बंद और घर्र-घर्र की आवाज आने लगी। हम थक गए भाई। एक गिलास पानी और लाओ।ÓÓ उनकी पत्नी पानी लेकर आई। पानी देने के बाद बोली- ''अब का करोगे। भ्रष्टाचार की शिकायत के लिए ये हेल्प लाइन समझ में आ नहीं रही।ÓÓ
तिवारी जी बोले- ''हम समझ गए। हम एक काम करते हैं।ÓÓ
श्रीमती तिवारी ने पूछा- ''क्या।ÓÓ
तिवारी जी बोले- ''भ्रष्टाचार की शिकायत के लिए हम अपनी एक संस्था बनाते हैं- दुखी-पीडि़त आएं और कम शुल्क देकर भ्रष्टाचार की शिकायत करने हमारी संस्था की मदद लें। हम सरकारी नौकरी में हैं तो हम अपने नाम से तो संस्था खोल नहीं सकते न ऐसी संस्था के साथ जुड़ सकते इसलिए तुम्हें संस्था का संयोजक बनाते हैं।ÓÓ
श्रीमती तिवारी ने पूछा- ''हमें करना क्या होगा।ÓÓ
तिवारी जी ने कहा- ''एक बोर्ड बनवाएंगे। फेस बुक पर, नेट पर जानकारी देंगे। अखबारों में विज्ञापन देंगे। एक कुर्सी-टेबल लगाकर तुम बैठना और एक सहायक रखना। आने वालों को एप्लीकेशन फार्म देना। वे भर कर दें। यहां से हेल्प लाईन पर फोन कर देना है, बस।ÓÓ
''हमें क्या मिलेगाÓÓ श्रीमती तिवारी ने पूछा।
तिवारी जी बोले- ''हर एक एप्लीकेंट से केवल सौ रुपए लेंगे। देखना भीड़ लगेगी। घर बैठे तुम कमाना- और सेवा का पुण्य भी कमाना। स्वयंसेवी संस्था का दर्जा पा जाओगी श्रीमती तिवारी।ÓÓ इतना कहकर तिवाजी मध्य वर्ग के व्यक्ति की तरह तनावमुक्त हुए ठीक उसी तरह जैसे टी.वी. पर भ्रष्टाचार की चर्चा सुनकर तनाव मुक्त होते हैं कि देश में भ्रष्टाचार को लेकर गर्मागर्म चर्चा हो रही है। मिडिल क्लास का आदमी खुश होता है तो उसके सर के बाल किसी लता की तरह खूबसूरत दिखते हैं और जब निराश होता है तो बाल केंचुए की तरह लटक जाते हैं।