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Saturday 18 Nov 2017

क्या फर्क पड़ता है!

बलदेव वंशी
बी-684, से-49, सैनिक
कॉलोनी, फरीदाबाद-121001
मो. 9810749703
वापिस लौटने के विश्वास में
खुश खुश घर से निकले लोग
साबुत
श्मशान या कब्रिस्तान पहुंच जाएं?
'क्या फर्क पड़ता है!Ó

सुंदर रूप
विरुप हो जाएं
या विद्रूप में बदल जाएं?
'क्या' फर्क पड़ता है!'

बोलती गाती
कुछ भव्य आकृतियां
कला की अद्वितीय निर्मितियां
देखते-देखते
चीखों-घावों-धूलों में बदल जाएं?
'क्या $फर्क पड़ता है!Ó

पड़ता है $फर्क
जरूर  पड़ता है
लाखों वर्षों में
पशु से मनुष्य बनने का क्रम
अंधी खाइयों से रोशनी में आने का इतिहास
बरबस उलटता है
और आदिम पशु
सब कुछ को रौंदता हुआ
पुन: अंधेरी खंदकों में
उतरता है!