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Sunday 01 Mar 2015

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ललित सुरजन
मेरे सामने एक नई पुस्तक है, आकर्षक मुखपृष्ठ, चिकने पन्ने, उम्दा छपाई, रंगीन तस्वीरें, लालित्यपूर्ण भाषा और विषय भी एकदम नया। ऐसा विषय जिस पर अमूमन हिन्दी में किताबें नहीं लिखी जातीं। लेखक हिंदी जगत के लिए लगभग अपरिचित व्यक्ति हैं- शिक्षा से चिकित्सक, पेशा डॉक्टरी छोड़कर अखबार प्रबंधन, रुचि से प्रकृति प्रेमी और कवि तो नहीं, किन्तु अवश्य ही कवि-हृदय।
पुस्तक के शीर्षक से विषय परिचय हो जाएगा- \'\'विकराल वनांचलों की विभीषिकाओं में एक वनप्रेमीÓÓ। विकराल और विभीषिका जैसे शब्द सुनकर डर लग सकता है; यह अंदाज हो सकता है कि यह जंगल महकमे के किसी अधिकारी या किसी शिकारी के लोमहर्षक अनुभवों की कथा है। वास्तव में ऐसा है नहीं, यह

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  • मेरे सामने एक नई पुस्तक है, आकर्षक मुखपृष्ठ, चिकने पन्ने, उम्दा छपाई, रंगीन तस्वीरें, लालित्यपूर्ण भाषा और विषय भी एकदम नया। ऐसा विषय जिस पर अमूमन हिन्दी में किताबें नहीं लिखी जातीं। लेखक हिंदी जगत के लिए लगभग अपरिचित व्यक्ति हैं- शिक्षा से चिकित्सक, पेशा डॉक्टरी छोड़कर अखबार प्रबंधन, रुचि से प्रकृति प्रेमी और कवि तो नहीं, किन्तु अवश्य ही कवि-हृदय।
  • By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
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  • By : बलदेव कृष्ण कपूर     View in Text Format    |     PDF Format
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  • By : गोविन्द उपाध्याय     View in Text Format    |     PDF Format
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  • By : इंदुप्रकाश कानूनगो     View in Text Format    |     PDF Format
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  • By : ओम भारती     View in Text Format    |     PDF Format
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