Monthly Magzine
Tuesday 21 Aug 2018

Current Issue

साहित्य की हर विधा की भाषा, शैली और विषय निरूपण की अपनी-अपनी विशिष्टताएं होती हैं, इसलिए प्रत्येक विधा पाठक अथवा सहृदय से एक विशिष्ट व्यवहार की प्रत्याशा रखती है। मसलन उपन्यास को ही लें। अगर उपन्यास आकार में छोटा है तब भी उसे पढऩे के लिए सामान्य तौर पर कम से कम एक दिन का वक्त चाहिए और वह भी ऐसा कि पढ़ते समय कोई खलल न पड़े। नाटक को पढ़ा तो जा सकता है, लेकिन उसका रसास्वाद रंगमंच पर प्रस्तुति से ही संभव है। कविता भी पाठक से धैर्य और तल्लीनता की मांग करती है। उसे समाचार पत्र में छपी खबर की तरह नहीं पढ़ा जा सकता। इन सबसे अलग स्थिति कहानी की है। कहानियां अमूमन बहुत

Read More

Current Issue Article

  • ललित सुरजन
  • By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • असहयोग आन्दोलन में राहुलजी का योगदान
  • By : डॉ. व्रजकुमार पांडेय     View in Text Format    |     PDF Format
  • नारी विमर्श और मीराकांत के नाटक
  • By : डॉ. लीना. बी.एल     View in Text Format    |     PDF Format
  • त्रिलोचन के काव्य में प्रगतिशील चिंतन
  • By : आशाराम साहू     View in Text Format    |     PDF Format
  • स्त्री-पुरुष सम्बन्धों के आइने में स्वयं प्रकाश की कहानियां
  • By : बीरज पाण्डेय     View in Text Format    |     PDF Format
  • फाजिल्का : बंगला से बॉर्डर तक
  • By : भावना शर्मा     View in Text Format    |     PDF Format
  • कवि सम्मेलनों में ठेकेदार पैदा हो गये हैं
  • By : अशोक 'अंजुम’     View in Text Format    |     PDF Format
  • अब यादें ही धरोहर है
  • By : विद्या गुप्ता     View in Text Format    |     PDF Format
  • चंद्रकांत देवताले : जनपद का एक आदिवासी
  • By : कैलाश बनवासी     View in Text Format    |     PDF Format
  • पुनर्जागरण से पुनर्मरण की ओर
  • By : सर्वमित्रा सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
View All Article »