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Wednesday 10 Feb 2016

Current Issue

ललित सुरजन
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा अपने स्थापना काल से लगातार गलत कारणों से अखबारों में सुर्खियां बटोरता रहा है। यह आज के क्रूर समय की विडंबना है कि विश्वविद्यालय ने जो एक बड़ा महत्वपूर्ण कार्य कुछ समय पहले संपादित किया उसकी जैसी चर्चा और प्रशंसा होना चाहिए थी वह आज तक नहीं हुई। इस राष्ट्रीय तो क्या अंतरराष्ट्रीय महत्व के संस्थान को जो पहले तीन कुलपति मिले वे हिन्दी साहित्य और भाषा में प्रमुख स्थान रखते थे; उनकी संस्थान के विकास को लेकर अपनी-अपनी योजनाएं और महत्वाकांक्षाएं थीं। सबकी अपनी-अपनी कार्यपद्धति भी थी। यह हम देख सकते हैं कि संस्थान को जिस गति के साथ आगे बढऩा चाहिए था

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  • महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा अपने स्थापना काल से लगातार गलत कारणों से अखबारों में सुर्खियां बटोरता रहा है।
  • By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
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