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Friday 31 Oct 2014

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ललित सुरजन
यह सन् 1965 की बात है। रायपुर के दुर्गा महाविद्यालय ने प्रदेश के पांच मूर्धन्य साहित्यकारों का सम्मान करने का निर्णय लिया, वे थे- मुकुटधर पाण्डेय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मावलीप्रसाद श्रीवास्तव, बलदेव प्रसाद मिश्र एवं सुंदरलाल त्रिपाठी। इसी अवसर पर छत्तीसगढ़ के साहित्य एवं संंस्कृति पर केन्द्रित एक स्मारिका \'\'व्यंजनाÓÓ  शीर्षक से प्रकाशित करने का निर्णय भी लिया गया। महाविद्यालय में एक वर्ष पूर्व ही एम.ए. की पढ़ाई शुरू हुई थी। मैं अंतिम वर्ष का विद्यार्थी था। साथ ही हिन्दी साहित्य परिषद का अध्यक्ष भी। मेरे अध्यापकों ने मुझ पर विश्वास रखते हुए स्मारिका के छात्र संपादक का दायित्व भी मुझे सौंप दिया था। उस समय मैंने अपने सहपाठियों से साहित्य-संस्कृति के विभिन्न पहलुओं

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  • यह सन् 1965 की बात है। रायपुर के दुर्गा महाविद्यालय ने प्रदेश के पांच मूर्धन्य साहित्यकारों का सम्मान करने का निर्णय लिया, वे थे- मुकुटधर पाण्डेय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मावलीप्रसाद श्रीवास्तव, बलदेव प्रसाद मिश्र एवं सुंदरलाल त्रिपाठी।
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