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Friday 25 Apr 2014

Current Issue

ललित सुरजन
\'\'आज बंद हैं  दुनिया के तमाम स्कूल  रविवार जो है  बच्चों के बिना  जैसे भुतहा महलों में  तब्दील हो गए हैं स्कूल  हाथों में छड़ी लिए  घूम रही हैं  गुस्सैल प्रेतात्माएं  जब तक पूरा नहीं होगा  बच्चों का होमवर्क  बेचैन प्रेतात्माएं  यूं ही भटकती रहेंगी।\'\' (होमवर्क)
महज तेरह पंक्तियों की छोटी-सी कविता। क्या कह रही है ये कविता? क्या इसे पढ़कर आप व्याकुलता अनुभव कर रहे हैं? क्या आपको लगा कि यह कविता आपको उठाकर कहीं साथ चलने का इसरार कर रही है? कहां- किसी स्कूल में, आपके बच्चों की दुनिया में, उनकी कापी किताबों में!
मैंने जब यह कविता पढ़ी तो मेरे सामने जैसे किसी भव्य

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  • संविधान की प्रस्तुति
  • By : सर्वमित्रा सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • ''आज बंद हैं दुनिया के तमाम स्कूल रविवार जो है बच्चों के बिना जैसे भुतहा महलों में तब्दील हो गए हैं स्कूल हाथों में छड़ी लिए घूम रही हैं
  • By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • समर 1857 और शाइरी के शीशे में बहादुर शाह 'जफर'
  • By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
  • फिर कहीं मिलेंगे
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  • अनोखा प्रतिशोध
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  • देख रही जनता बेहाल
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  • कश्ती और बरेटा का लोकार्पण
  • By : अन्य     View in Text Format    |     PDF Format
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