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Saturday 30 Aug 2014

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ललित सुरजन

मेरे  सामने कुछ किताबें रखी हैं। इनमें से एक है \'\'महागुरु मुक्तिबोध : जुम्मा टैंक की सीढिय़ों पर। इसी वर्ष प्रकाशित इस पुस्तक के लेखक कांतिकुमार जैन हैं जो संस्मरण विधा को नई ऊंचाइयों तक ले गए हैं। उनकी आत्मकथात्मक पुस्तक- \'\'बैकुण्ठपुर में बचपन पर मैं अक्षर पर्व में पूर्व में चर्चा कर चुका हूं। दूसरी पुस्तक है- \'\'दर्पण देखे मांज के (परसाई : जीवन और चिंतन)।  डॉ. रामशंकर मिश्र इस पुस्तक के लेखक हैं। जबलपुर निवासी मिश्र जी आत्मप्रचार से दूर भागते हैं। उन्हें खामोशी के साथ अपना काम करना भाता है, यद्यपि वे एक संवेदनशील कवि, उपन्यासकार व अनुवादक होने के साथ-साथ सही मायनों में सुधी समीक्षक भी हैं।

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  • मेरे सामने कुछ किताबें रखी हैं। इनमें से एक है ''महागुरु मुक्तिबोध : जुम्मा टैंक की सीढिय़ों पर।
  • By : ललित सुरजन     View in Text Format    |     PDF Format
  • स्थापित किये जाने चाहिये साहित्य के तीर्थ स्थल
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  • भविष्यफल
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  • पहचान की पहचान
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